मध्य प्रदेशराज्य

निगम कमिश्नर का ‘पावर पंच’: हड़ताली नेताओं पर गिरी निलंबन की गाज, चार से छीने प्रभार; आनंद मंगल गुरु को थमाया नोटिस

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ एक तरफ जहां सागर नगर निगम की माली हालत पतली है और खुद भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन कर्मचारियों के वेतन के लिए भोपाल में मुख्यमंत्री के सामने झोली फैलाए खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम मुख्यालय में ‘अंदरूनी जंग’ छिड़ गई है। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और हड़ताल का बिगुल फूंकने वाले कर्मचारी नेताओं पर नगर निगम कमिश्नर ने ऐसा ‘पावर पंच’ मारा है कि पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। कमिश्नर ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एक स्थायीकर्मी को सीधे सस्पेंड कर दिया है, जबकि चार बड़े रसूखदार कर्मचारी नेताओं से उनके महत्वपूर्ण प्रभार छीनकर उन्हें घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली है। इतना ही नहीं, निगम के ‘मंगल’ करने का दावा करने वाले आनंद मंगल गुरु को भी कारण बताओ नोटिस थमाकर उनकी ‘कुंडली’ खंगालना शुरू कर दिया है।

हड़ताल पड़ी भारी, कमिश्नर ने एक झटके में छीनी ‘कुर्सियां’

नगर निगम गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से वेतन और अन्य मांगों को लेकर निगम में हड़ताल और नारेबाजी का दौर चल रहा था। कर्मचारी नेता सोच रहे थे कि दबाव बनाकर काम निकाल लेंगे, लेकिन पासा उलटा पड़ गया। कमिश्नर ने अनुशासनहीनता और काम में लापरवाही को हथियार बनाकर हड़ताल की अगुवाई कर रहे चेहरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया है। इस बड़ी प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक में एक स्थायी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। वहीं, चार ऐसे कर्मचारियों को झटका दिया गया है जो सालों से मलाईदार प्रभारों पर कुंडली मारकर बैठे थे; कमिश्नर ने एक ही आदेश से उनसे सारे प्रभार वापस ले लिए हैं।

 

इस पूरी कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा आनंद मंगल गुरु को मिले नोटिस की है। कर्मचारी राजनीति में खासा दखल रखने वाले और व्यवस्थाओं को अपने हिसाब से ‘मंगल’ करने वाले गुरु जी को कमिश्नर ने ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाकर उनके होश उड़ा दिए हैं। अब आलम यह है कि निगम के भीतर जो नेता कल तक टेबल ठोककर अपनी मांगें मनवाने की हुंकार भर रहे थे, वे आज अपने वजूद और प्रभार बचाने के लिए कानूनी व प्रशासनिक दलीलों के पन्ने पलट रहे हैं।

कमिश्नर के कड़े तेवर— “काम नहीं तो दाम नहीं, अनुशासनहीनता पर नो मर्सी”

सूत्रों की मानें तो इस कार्रवाई के जरिए निगम प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि नगर निगम भले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो, लेकिन अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। एक तरफ जहां निगम की खाली तिजोरी को भरने के लिए शासन स्तर पर विशेष अनुदान की गुहार लगाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ काम बंद कर व्यवस्था ठप करने वाले ‘बागियों’ पर कमिश्नर का यह आक्रामक रुख चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि कमिश्नर के इस तगड़े प्रहार के बाद कर्मचारी संगठन घुटने टेकता है या आंदोलन की आग और भड़कती है।

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