जबलपुरमध्य प्रदेश

56 वर्ष पार अभ्यर्थियों को CAT से अंतरिम राहत, कैडर रिव्यू में देरी पर केंद्र-राज्य से जवाब तलब, जबलपुर खंडपीठ का अहम आदेश—“प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों पर नहीं”

जबलपुर: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जबलपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में आवेदकों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकरण ने प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ पाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और दोनों सरकारों से जवाब तलब किया है। यह मूल आवेदन (OA) जितेन्द्र सिंह, सत्येंद्र सिंह तोमर एवं मुकेश कुमार वैश्य द्वारा दायर किया गया था। आवेदकों ने 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाने के बावजूद भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपने अभ्यर्थित्व पर विचार किए जाने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाने वाला अनिवार्य कैडर रिव्यू समय पर नहीं हुआ। वर्ष 2018 में होना प्रस्तावित कैडर रिव्यू 2022 में, यानी चार वर्ष की देरी से किया गया। इस विलंब के कारण आवेदक आयु सीमा पार कर गए, जिससे उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए। आवेदकों का तर्क है कि वे नियमानुसार आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं और भारतीय पुलिस सेवा में चयन के पात्र हैं। इसके बावजूद 26-27 वर्ष की सेवा के बाद भी उनका चयन नहीं हो पाया। उनका कहना है कि यदि कैडर रिव्यू समय पर होता, तो वे निर्धारित आयु सीमा के भीतर चयन प्रक्रिया में भाग ले सकते थे।

मामले में आवेदकों की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे एवं अक्षय खंडेलवाल ने प्रभावी पैरवी करते हुए दलील दी कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा आवेदकों पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने अधिकरण के समक्ष यह भी कहा कि यह विलंब पूरी तरह से सरकारी तंत्र की विफलता है, न कि आवेदकों की। अधिकरण ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए अंतरिम राहत प्रदान की और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए। साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया है। इस आदेश को आवेदकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह निर्णय प्रशासनिक देरी से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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