होम्योपैथिक चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ कहना मानहानिकारक, एनसीएच ने जारी किए सख्त निर्देश
आयोग का निर्णय स्वागत योग्य : डॉ. सुनील मिश्रा

जबलपुर, यशभारत। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अंतर्गत होम्योपैथी आचार एवं पंजीकरण बोर्ड (बीईआरएच) ने पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों की प्रतिष्ठा और अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम-2020 के तहत होम्योपैथी देश में विधिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है तथा राष्ट्रीय या राज्य रजिस्टर में पंजीकृत चिकित्सकों को कानून के अनुसार चिकित्सा अभ्यास करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
आयोग ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों पर होम्योपैथी तथा उसके पंजीकृत चिकित्सकों के खिलाफ की जा रही अपमानजनक, भ्रामक और मानहानिकारक टिप्पणियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। परिपत्र में कहा गया है कि किसी भी पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक को ‘झोलाछाप’ बताने वाली प्रेस विज्ञप्ति, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट सामग्री, सरकारी दस्तावेज, एफआईआर, शिकायत अथवा अन्य आधिकारिक संचार को भ्रामक और मानहानिकारक माना जाएगा। ऐसे कृत्य चिकित्सकों की पेशेवर प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के साथ उनके वैधानिक एवं संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन कर सकते हैं।
आयोग ने सभी सरकारी संस्थानों, अधिकारियों और संबंधित पक्षों को निर्देशित किया है कि होम्योपैथी से जुड़े मामलों में सार्वजनिक बयान जारी करते समय संयमित, जिम्मेदार और तथ्यपरक भाषा का प्रयोग किया जाए। यदि किसी चिकित्सक के आचरण अथवा कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत हो तो उसका निराकरण निर्धारित वैधानिक एवं अनुशासनात्मक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए, न कि पूरे होम्योपैथिक समुदाय को कटघरे में खड़ा किया जाए। आयोग ने चेतावनी दी है कि होम्योपैथी और उसके पंजीकृत चिकित्सकों की छवि धूमिल करने के किसी भी जानबूझकर किए गए प्रयास पर प्रचलित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आयोग का निर्णय स्वागत योग्य : डॉ. सुनील मिश्रा
केंद्रीय होम्योपैथी परिषद में महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके जबलपुर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. सुनील मिश्रा ने आयोग के इस परिपत्र का स्वागत करते हुए कहा कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ कहे जाने के विरुद्ध लंबे समय से मांग उठाई जा रही थी। आयोग का यह निर्णय चिकित्सकों की गरिमा और सम्मान की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक कदम साबित होगा।






