मासूम से दरिंदगी: हाईकोर्ट ने बरकरार रखी अतुल की तिहरी फांसी, कहा- समाज की आत्मा को संतुष्ट करने के लिए मौत जरूरी

मासूम से दरिंदगी: हाईकोर्ट ने बरकरार रखी अतुल की तिहरी फांसी, कहा- समाज की आत्मा को संतुष्ट करने के लिए मौत जरूरी
हैवानियत की सारी हदें पार हुईं, यह रेयरेस्ट ऑफ रेयरकेस; दोषी की मां और बहन को भी दो-दो साल की जेल
भोपाल, यशभारत। राजधानी के शाहजहाँनाबाद थाना क्षेत्र में 24 सितंबर 2024 को हुई पांच साल की मासूम बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने आरोपी अतुल की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला माना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी के साथ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
साक्ष्य छिपाने पर मां और बहन को भी सजा
अदालत ने केवल मुख्य आरोपी को ही दंडित नहीं किया, बल्कि उसकी मदद करने वाली मां बसंती और बहन चंचल को भी दोषी पाया। इन दोनों को घटना को छिपाने और सबूत मिटाने में सहायता करने के लिए दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।
डीएनए और 22 गवाहों ने पुख्ता किया मामला
इस जघन्य हत्याकांड की जांच एसीपी अंकिता खातरकर ने की थी। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विशेष जोर दिया, जिसमें डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट सबसे अहम साबित हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों को पेश किया। मौखिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह साबित हुआ कि अतुल ने ही बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दरिंदगी की और फिर उसकी हत्या कर दी।
निचली अदालत के फैसले पर मुहर
इससे पहले 10 मार्च 2025 को भोपाल की पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने अतुल को तिहरी फांसी की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और समाज पर इसके प्रभाव को देखते हुए निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया।







