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नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

कहा- विरोध करें, लेकिन जनजीवन बाधित न हो

मुंबई, यशभारत। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि एयरपोर्ट का नाम तय करना सरकार की नीति से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज कर दी।
यह याचिका ‘प्रकाशजोत सामाजिक संस्था’ की ओर से दायर की गई थी। संस्था ने मांग की थी कि नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘लोकनेता डी.बी. पाटिल नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखा जाए और इस संबंध में केंद्र सरकार को समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने इसे कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का मामला बताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर आम लोगों को परेशानी पहुंचाना या जनजीवन प्रभावित करना उचित नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सड़कों पर उतरकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ना या सार्वजनिक जीवन बाधित करना किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन का उचित तरीका नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन हमेशा संवैधानिक मर्यादाओं और कानूनी दायरे में रहकर ही किए जाने चाहिए।

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