भोपाल केंद्रीय जेल बनी प्रदेश की पहली तनाव-मुक्त मॉडल जेल, प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत शुरू हुआ देश का 9वां साइको सोशल केयर सेंटर

भोपाल केंद्रीय जेल बनी प्रदेश की पहली तनाव-मुक्त मॉडल जेल, प्रोजेक्ट प्रहरी के तहत शुरू हुआ देश का 9वां साइको सोशल केयर सेंटर
भोपाल, यशभारत। जेलों को अब केवल बंदियों की सुरक्षा और निगरानी तक सीमित न रखकर, उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य सुधार के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश जेल विभाग ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (गांधीनगर, गुजरात) के साथ मिलकर प्रोजेक्ट प्रहरी की शुरुआत की है। इसके तहत भोपाल स्थित केंद्रीय जेल में प्रदेश के पहले साइको सोशल केयर सेंटर की शुरुआत की गई, जिसका उद्घाटन जेल डीजी वरुण कपूर ने किया।
अपराध बोध और तनाव से मिलेगी मुक्ति
जेल में बंद कैदियों में अकेलापन, अवसाद और हिंसक प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए इस सेंटर में प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा नियमित काउंसलिंग दी जाएगी। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित जेल अधिकारी और कर्मचारी बंदियों की मानसिक स्थिति और व्यावहारिक समस्याओं का आकलन करेंगे। शुरुआती बातचीत के अलावा गंभीर स्थिति वाले बंदियों के लिए नियमित इलाज और फॉलोअप की भी व्यवस्था रखी गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर 9वां विशेष केंद्र
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के निदेशक राकेश सिंह के अनुसार, देशभर में इस तरह की पहल का यह 9वां केंद्र है। भोपाल जेल में मिलने वाले फीडबैक और परिणामों के आधार पर इस प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से मध्य प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू किया जाएगा।
समाज में पुनर्वास ही मुख्य लक्ष्य
जेल डीजी वरुण कपूर ने स्पष्ट किया कि जेल का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों का सुधारात्मक पुनर्वास करना है। जब बंदी सजा पूरी कर बाहर आएं, तो वे समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक बन सकें इसके लिए उनका मानसिक रूप से स्वस्थ और सकारात्मक होना बेहद जरूरी है।







