नौनिहालों के भविष्य पर ‘बदहाली’ का पहरा: छात्रावास में गंदगी का अंबार, दूषित पानी पीने को मजबूर छात्र

यशभारत डिंडौरी।जिले के बजाग विकासखंड अंतर्गत चाड़ा स्थित सीनियर बालक छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्रावास में गंदगी, पेयजल टंकी की साफ-सफाई में लापरवाही, बदहाल बाथरूम और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं होने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सरकारी छात्रावासों में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रावास से संबंधित सामने आई तस्वीरों में परिसर में गंदगी और बाथरूम की खराब स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। परिसर में बीड़ी के पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन तस्वीरों और शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
पेयजल टंकी की सफाई पर सवाल
छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए पेयजल की स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है। आरोप हैं कि पानी की टंकी में गंदगी और कीड़े पाए जा रहे हैं। यदि टंकी की नियमित सफाई नहीं हो रही है, तो दूषित पानी के सेवन से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में टंकी की तत्काल सफाई कराने के साथ पानी की गुणवत्ता की जांच कराना भी आवश्यक है।
स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों के बार-बार बीमार पड़ने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, बच्चों की बीमारी और पेयजल की गुणवत्ता के बीच संबंध की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बिना नहीं की जा सकती। इसके बावजूद छात्रावास में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जाना जरूरी है।
बिस्तर और भोजन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
छात्रावास में विद्यार्थियों को पर्याप्त बिस्तर और बेडशीट उपलब्ध नहीं होने के आरोप भी लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विद्यार्थियों को कंबल का उपयोग बेडशीट के विकल्प के रूप में करना पड़ रहा है। यदि ऐसा है, तो यह छात्रावास में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को दर्शाता है।
इसके अलावा भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता और निर्धारित मेन्यू के पालन को लेकर भी जांच की आवश्यकता है। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण, पौष्टिक भोजन, साफ पेयजल और पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध कराना संबंधित व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अधीक्षक और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल
चाड़ा सीनियर बालक छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रावास अधीक्षक शिवप्रसाद पनिका और संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और शिकायतों पर उनकी प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
डिंडौरी जिले के आदिवासी एवं बैगा बाहुल्य क्षेत्रों में छात्रावास विद्यार्थियों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में छात्रावासों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग के अधिकारी छात्रावास का मौके पर निरीक्षण करें, पेयजल टंकी की स्थिति और पानी की गुणवत्ता की जांच कराएं तथा बिस्तर, भोजन और साफ-सफाई की व्यवस्था का आकलन करें। शिकायतें सही पाए जाने पर कमियों को दूर करने के साथ जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
सवाल यह है कि सरकारी छात्रावासों में बच्चों की सुविधाओं के लिए किए जा रहे इंतजामों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है और चाड़ा छात्रावास की शिकायतों पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा?







