भोपालमध्यप्रदेश

यश भारत भोपाल।

VIT भोपाल मामले में एनएचआरसी सख्त, शासन और यूजीसी से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक लोकेशन पर उठाए सवाल, 29 नवंबर तक जवाब देने के निर्देश

भोपाल, यश भारत। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी  भोपाल के नाम और वास्तविक भौगोलिक स्थान को लेकर राष्ट्रीय छात्र संघ  की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग  ने मध्यप्रदेश शासन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  से दोबारा जवाब तलब किया है। आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और यूजीसी अध्यक्ष को चार सप्ताह में अतिरिक्त रिपोर्ट एवं कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 29 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द के इस्तेमाल से विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। शिकायत के अनुसार विश्वविद्यालय का परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।

राज्य सरकार की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

आयोग की 22 अक्टूबर 2026 की कार्यवाही में कहा गया कि विश्वविद्यालय का नाम कानून के तहत निर्धारित होने के बावजूद उसकी वेबसाइट, प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में वास्तविक स्थान की जानकारी किस तरह दी जाती है, यह स्पष्ट होना चाहिए। आयोग ने माना कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। शिकायत में परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और अशांति की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया गया था। आयोग ने इन आरोपों की जांच संबंधी जानकारी नहीं मिलने पर अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है। इन आरोपों पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।

यूजीसी की भूमिका पर भी जवाब तलब

आयोग ने सरकारी दस्तावेजों में राजपत्र अधिसूचना की तारीखों में अंतर पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही 30 मार्च और 5 जून 2026 को निर्देश जारी होने के बावजूद यूजीसी का जवाब नहीं मिलने का उल्लेख किया है। आयोग ने दोनों प्राधिकरणों से शिकायत के सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मांग की कि विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के वास्तविक परिसर सुविधाओं और प्रवेश संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने वेबसाइट  प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों की निष्पक्ष जांच तथा शिकायत में उठाए गए अन्य मुद्दों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। अब 29 नवंबर तक शासन और यूजीसी की रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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