निजी विश्वविद्यालय विधेयक पर अभाविप का विरोध , शिक्षा नहीं, व्यापारीकरण को मिलेगा बढ़ावा 25 एकड़ भूमि के प्रावधान में ढील पर उठाए सवाल, गुणवत्ता और पारदर्शिता से समझौता नहीं करने की मांग
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निजी विश्वविद्यालय विधेयक पर अभाविप का विरोध , शिक्षा नहीं, व्यापारीकरण को मिलेगा बढ़ावा
25 एकड़ भूमि के प्रावधान में ढील पर उठाए सवाल, गुणवत्ता और पारदर्शिता से समझौता नहीं करने की मांग
भोपाल, यश भारत। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 का कड़ा विरोध जताया है। परिषद का आरोप है कि यह संशोधन उच्च शिक्षा को मजबूत करने के बजाय शिक्षा के व्यापारीकरण और निजी व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने वाला है। अभाविप ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित मानकों में ढील देने से मनमानी भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं बढ़ेंगी। वर्तमान अधिनियम 2007 की धारा 7 में विश्वविद्यालय स्थापना के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि का स्पष्ट प्रावधान है लेकिन प्रस्तावित संशोधन में पर्याप्त भूमि जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इससे भविष्य में नियमों की मनमानी व्याख्या और दुरुपयोग का रास्ता खुल सकता है। परिषद ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पर्याप्त भूमि समुचित परिसर और आवश्यक शैक्षणिक अधोसंरचना अनिवार्य है। ऐसे में निर्धारित मानकों को कमजोर करना न केवल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डालेगा बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से भी समझौता होगा।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि शिक्षा को बाजार की वस्तु नहीं बनाया जा सकता। उच्च शिक्षा में सुधार का आधार गुणवत्ता पारदर्शिता और विद्यार्थियों का हित होना चाहिए न कि व्यावसायिक लाभ। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित संशोधन विधेयक वापस लेकर शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।







