वेतन आयोग रखे न्यूनतम वेतन 69 हजार,सालाना वेतन वृद्धि 6 प्रतिशत और सेवाकाल में मिले पांच पदोन्नति :शर्मा

जबलपुर यशभारत। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रेल कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों में सुधार को लेकर महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) ने कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 69 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने और 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही वर्तमान 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई गई है। फेडरेशन की ओर से 30 अक्टूबर 26 को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा है. उक्त जानकारी वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री अशोक शर्मा ने रेल कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन द्वारा उठाए गए मुद्दों की विस्तृत जानकारी दी.
वेतन और पदोन्नति में बड़े बदलाव की मांग
कर्मचारी संगठन ने वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ न्यूनतम 10 हजार रुपये का वित्तीय लाभ देने तथा पूरे सेवाकाल में कम से कम पांच पदोन्नतियां अथवा वित्तीय उन्नयन सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा है। महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत होने पर उसे मूल वेतन में शामिल करने और रेलवे की जोखिमपूर्ण कार्यप्रणाली को देखते हुए अलग वेतन ढांचा बनाने की मांग भी की गई है।
पेंशन और भत्तों में सुधार का प्रस्ताव
.पेंशन के मामले में अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत सामान्य पेंशन तथा 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है। पेंशन कम्यूटेशन की वसूली अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष करने और बंद किए गए भत्तों को बहाल करने की मांग भी शामिल है।
रेलवे कॉलोनियों की सुविधाओं पर जोर
रेलवे कर्मचारियों के आवासों में स्वच्छ पेयजल, नियमित सफाई, सुरक्षा, खेल मैदान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत उठाई गई है। रनिंग रूम में भोजन और विश्राम की गुणवत्ता सुधारने के साथ लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, ट्रैक मेंटेनर तथा सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग की गई है। महिला रेल कर्मचारियों की कार्यस्थल संबंधी कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें सुविधाजनक विभागों में समायोजन का विकल्प देने तथा जोखिमपूर्ण कार्यों के लिए अतिरिक्त भत्ते की मांग भी उठाई गई है।







