अटल पथ पर बीजेपी की रैली, डीईओ के लचीले आदेश ने बढ़ाई बच्चों-अभिभावकों की धड़कनें

राजधानी में सियासत और जाम : अटल पथ पर बीजेपी की रैली, डीईओ के लचीले आदेश ने बढ़ाई बच्चों-अभिभावकों की धड़कनें
टीटी नगर में 50 हजार लोगों की भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट के बीच कई स्कूलों ने खुद लिया छुट्टी का फैसला
प्रशासन की दो टूक व्यवस्था न होने से सुबह-सुबह सड़कों पर लगा जाम, पालकों को उठानी पड़ी परेशानी
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज मंगलवार 4 नवंबर को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रैली और शक्ति प्रदर्शन का असर आम जनजीवन और स्कूली बच्चों पर साफ देखने को मिला। टीटी नगर स्थित अटल पथ क्षेत्र में आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने के अनुमान के चलते प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम किए हैं। हालांकि, स्कूलों की टाइमिंग और अवकाश को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कोई स्पष्ट और एकसमान आदेश जारी न करने के कारण स्कूलों और अभिभावकों के बीच सुबह-सुबह भारी असमंजस की स्थिति बनी रही।
प्रशासन ने छोड़ी जिम्मेदारी, स्कूलों ने खुद संभाला मोर्चा
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी आदेश में यह तो मान लिया गया था कि कार्यक्रम में 40 से 50 हजार से अधिक लोगों के जुटने से शहर के प्रमुख मार्ग विशेषकर रोशनपुरा, लिंक रोड नंबर 1 और 2, भदभदा, जवाहर चौक और पॉलिटेक्निक चौराहा प्रभावित हो सकते हैं। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग ने शहरभर के सभी स्कूलों के लिए सीधे अवकाश की घोषणा करने के बजाय गेंद पूरी तरह स्कूल प्रबंधनों के पाले में डाल दी। विभाग ने स्कूलों को अपनी भौगोलिक स्थिति और बच्चों के रूट का आकलन कर खुद टाइमिंग बदलने या संचालन पर निर्णय लेने की छूट दी।
इस विवेक आधारित प्रशासनिक निर्देश के बाद शहर के कई प्रमुख और बड़े निजी विद्यालयों ने बच्चों की सुरक्षा और संभावित जाम के खतरे को भांपते हुए खुद ही अवकाश घोषित कर दिया। वहीं, कई स्कूल खुले रहे, जिसके चलते अभिभावक सुबह-सुबह अपने बच्चों को लेकर पशोपेश में नजर आए।
सियासी सरगर्मी और ट्रैफिक डायवर्जन से आम लोग हलकान
सुबह से ही वीवीआईपी मूवमेंट और हजारों कार्यकर्ताओं के वाहनों के आगमन के कारण राजधानी के कई मुख्य मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू करना पड़ा। रैली स्थल के आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे सुबह ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूल बस चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ जहां राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन से शहर की सड़कें पटी रहीं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों को रोजमर्रा की आवाजाही में ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
उठ रहे हैं सवाल
राजनीतिक आयोजनों और रैलियों के दौरान इस तरह के लचीले प्रशासनिक आदेशों पर अब सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि शहर के बड़े हिस्से में यातायात ठप होने की पूरी संभावना थी, तो जिला प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए थे, ताकि बच्चों और अभिभावकों को अंतिम समय में होने वाली मानसिक परेशानी से बचाया जा सके। फिलहाल, अधिकांश स्कूलों ने हालात को देखते हुए अपने स्तर पर स्थिति संभाल ली है, लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वीवीआईपी आयोजनों और आम जनजीवन की प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है।







