हेल्थ सिटी हॉस्पिटल पर आरोप मौत के बाद भी करते रहे इलाज,मौत के बाद भी अस्पताल ने लगा रखा था वेंटिलेटर

जबलपुर, यशभारत। शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज और उनकी जिंदगी से जुड़े सवाल एक बार फिर खड़े हो गए हैं। माढोताल थाना क्षेत्र स्थित कटंगी बाईपास के हेल्थ सिटी हॉस्पिटल में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक युवक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि मरीज की मौत होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उसे वेंटिलेटर पर रखकर इलाज जारी रखा और मृत्यु की जानकारी नहीं दी। मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों के परिजनों को दी जाने वाली जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, औरिया निवासी भगवत रजक (38) दो नवंबर की शाम सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे तत्काल कटंगी बाईपास स्थित हेल्थ सिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। परिजनों का आरोप है कि देर रात भगवत की मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल में उसे वेंटिलेटर पर रखकर इलाज जारी रखा गया। परिजनों के अनुसार, तीन नवंबर की दोपहर उन्होंने भगवत को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कहकर हेल्थ सिटी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराया और उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद भगवत को मृत घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद परिजनों ने हेल्थ सिटी हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यदि मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी, तो अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी?
महज दो किलोमीटर की दूरी, फिर भी मौत की जानकारी दूसरे अस्पताल में
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हेल्थ सिटी हॉस्पिटल से जिस निजी अस्पताल में भगवत को ले जाया गया, उसकी दूरी महज दो किलोमीटर बताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि इतने कम अंतराल में दूसरे अस्पताल पहुंचने पर मरीज को मृत घोषित किया गया, जबकि हेल्थ सिटी हॉस्पिटल में उसे वेंटिलेटर पर रखकर उपचार जारी होने की बात कही जा रही थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मरीज की वास्तविक स्थिति क्या थी और परिजनों को उसकी जानकारी कब और किस रूप में दी गई?
अब उठ रहे हैं जवाबदेही के सवाल
भगवत रजक की मौत के बाद सामने आए आरोपों ने अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मरीज की स्थिति क्या थी? क्या परिजनों को समय पर उसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी दी गई? क्या उपचार के दौरान मरीज की मृत्यु हुई थी या उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के समय उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी? इन सवालों का जवाब चिकित्सकीय दस्तावेजों, उपचार के रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा मौत के समय का खुलासा
मामले में युवक की मौत के सही समय को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही भगवत रजक की मौत के वास्तविक समय और उससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा अस्पताल में हुए उपचार, चिकित्सकीय दस्तावेजों और परिजनों के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई-दो बार सीपीआर देकर मरीज को किया रिकवर
वहीं, हेल्थ सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भगवत रजक की हालत बेहद गंभीर थी। उपचार के दौरान उसे दो बार सीपीआर दिया गया, जिसके बाद उसे रिकवर किया गया और इलाज जारी रखा गया। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीज की स्थिति और उपचार की जानकारी परिजनों को भी दी गई थी तथा उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। प्रबंधन के अनुसार, परिजन अपनी जवाबदारी पर मरीज को दूसरे अस्पताल लेकर गए थे, जहां उसकी मौत हुई।








