दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को बीना विधायक निर्मला सप्रे याचिका पर 2 महीने में फैसला लेने का निर्देश

नई दिल्ली: संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के निष्पक्ष क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े एक अहम मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे बीना सीट से चुनाव जीतने वाली विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ लंबित दलबदल विरोधी याचिका पर दो महीने (60 दिन) के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाएं।

यह पूरा विवाद वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली निर्मला सप्रे से जुड़ा है, जो मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक मंच पर भाजपा में शामिल हो गई थीं। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जुलाई 2024 में दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता निरस्त करने की याचिका विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दायर की थी।
मामले में हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की मजबूत दलीलों पर ध्यान देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि दलबदल याचिकाओं पर त्वरित कार्रवाई बेहद अनिवार्य है, भले ही उच्च न्यायालय को इसमें कोई जल्दबाजी न दिखी हो। सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख देश में दलबदल मामलों में होने वाली अनिश्चितकालीन देरी को रोकने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।







