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कच्ची सड़क पर दिखा ‘जुगनी’ बाघिन का कुनबा : चार शावकों के साथ सड़क पार करती नजर आई बाघिन, पर्यटकों ने कैमरों में कैद किया रोमांचक नजारा… देखें पूरा वीडियो

सिवनी यश भारत:-सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की अठखेलियों के बीच पर्यटकों को एक बार फिर जुगनी बाघिन अपने चार शावकों के साथ दिखाई दी। सफारी के दौरान बाघिन और उसके चारों शावक जंगल की कच्ची सड़क पार करते हुए चहलकदमी करते नजर आए। अचानक सामने आए बाघों के इस कुनबे को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। जिप्सी में सवार पर्यटकों ने इस दुर्लभ नजारे को अपने कैमरों में कैद कर लिया। बताया गया कि यह वीडियो रविवार रात का है, जो मंगलवार सामने आया।

जुगनी बाघिन पिछले करीब एक वर्ष से खवासा-तेलिया गेट क्षेत्र में अपने चार शावकों के साथ नजर आती रही है। इस क्षेत्र में सफारी करने वाले पर्यटकों के लिए बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जंगल के प्राकृतिक वातावरण में एक साथ पांच बाघों को विचरण करते देखना पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव रहा।

पहले भी सामने आ चुका है वीडियो

जुगनी बाघिन और उसके शावकों का ऐसा नजारा पहले भी सामने आ चुका है। गत 4 अक्टूबर को खवासा बफर क्षेत्र में सफारी के दौरान बाघिन अपने चार नन्हे शावकों के साथ पर्यटकों की जिप्सी के सामने से गुजरती दिखाई दी थी। इससे पहले पिछले वर्ष बाघिन एक-एक कर शावकों को सुरक्षित स्थान की ओर ले जाती नजर आई थी। शावक को मुंह में दबाकर ले जाती बाघिन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसे वन्यजीव प्रेमियों ने खूब पसंद किया था।

वन्यजीव पर्यटन के लिए खास है पेंच
मध्यप्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल पेंच टाइगर रिजर्व बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, गौर, हिरण और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी पर्यटकों को देखने मिलते हैं। जंगल के बीच से गुजरने वाले सफारी मार्गों पर वन्यजीवों की अचानक दिखाई देने वाली गतिविधियां पर्यटकों के रोमांच को बढ़ा देती हैं।

हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार शावकों के साथ मौजूद बाघिन के आसपास विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। सफारी के दौरान पर्यटकों को जिप्सी से उतरने, शोर मचाने, वन्यजीवों के नजदीक जाने या उनके रास्ते में बाधा डालने से बचना चाहिए। बाघिन और उसके शावकों को प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण करने देना ही वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से उचित है।

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