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‘जंबो’ पहचान पर पहरा: वन विभाग की कार्रवाई से व्यापारियों के उड़े होश, दो व्यापारियों का माल जब्त… देखें पूरा वीडियो

सिवनी यश भारत:-सिवनी जिले के छपारा में सीताफल मंडी में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो व्यापारियों का सीताफल जब्त कर लिया। वनक्षेत्रों में सीताफल संग्रहण पर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में फल पहुंचने और व्यापारियों द्वारा इसकी खरीदी-बिक्री किए जाने की जानकारी मिलने के बाद विभागीय अमले ने मंडी में दबिश दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से मंडी में हड़कंप मच गया और व्यापारियों के बीच हलचल की स्थिति निर्मित हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग को सूचना मिली थी कि प्रतिबंध के बावजूद वनक्षेत्रों से सीताफल एकत्र कर बाजार में बेचा जा रहा है। इसके बाद वन विभाग की टीम छपारा की सीताफल मंडी पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान दो व्यापारियों के पास मिले सीताफल को जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान छपारा वन परिक्षेत्र अधिकारी स्वाति सिन्हा सहित वन विभाग का अमला मौजूद रहा।

हालांकि, जब्त किए गए सीताफल की कुल मात्रा और संबंधित व्यापारियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

कच्चे फल तोड़ने से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका

जिला प्रशासन के अनुसार, सिवनी के सीताफल को जीआई टैग के माध्यम से विशिष्ट पहचान मिली है। इसकी ब्रांडिंग ‘जंबो सीताफल’ के नाम से की जा रही है। जिले में उत्पादित सीताफल की पहचान, गुणवत्ता और बाजार में उसकी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए फलों को उचित परिपक्वता पर तोड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कच्चे सीताफल को समय से पहले तोड़ने से उसके स्वाद, आकार और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी उद्देश्य से वनक्षेत्रों में सीताफल के संग्रहण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

सिवनी जिले के वनक्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से बड़ी मात्रा में सीताफल पाया जाता है। सीताफल का मौसम आते ही स्थानीय स्तर पर इसकी खरीदी-बिक्री बढ़ जाती है और यह ग्रामीणों तथा व्यापारियों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनता है। ऐसे में संग्रहण संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है, ताकि फलों की गुणवत्ता बनी रहे और जिले की विशिष्ट पहचान को नुकसान न पहुंचे।
छपारा मंडी में हुई कार्रवाई के बाद अब वन विभाग की निगरानी और सख्त होने की संभावना है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संग्रहण संबंधी प्रतिबंधों की जानकारी ग्रामीणों, फल संग्राहकों और व्यापारियों तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जाए, जिससे अनजाने में नियमों का उल्लंघन न हो।

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