आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा , EOW ने करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक समेत अन्य के खिलाफ दर्ज किया आपराधिक मामला

आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासाEOW ने करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक समेत अन्य के खिलाफ दर्ज किया आपराधिक मामला
भोपाल यश भारत। आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। 5 अक्टूबर 2026 को BNS 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत FIR दर्ज की गई है।
EOW की जांच के अनुसार, योजना के तहत सरकारी भुगतान हासिल करने के लिए अस्पताल के पोर्टल पर कर्मचारियों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया। जांच में सामने आया कि अस्पताल में वास्तविक रूप से 15 कर्मचारी होने के बावजूद पोर्टल पर 45 कर्मचारियों की सूची दर्ज की गई। आरोप है कि एक ही कर्मचारी का नाम चार-चार बार तक दोहराया गया और 45 प्रविष्टियों के सामने अस्पताल संचालक का ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया। जांच में अस्पताल की लैब को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि बिना अनुमति संचालित लैब से एम डी पैथोलॉजिस्ट की फर्जी सील और नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जांच रिपोर्ट जारी की गईं। इसके अलावा एक मेडिकल कॉलेज की महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम कथित तौर पर उसकी सहमति के बिना सूची में शामिल कर उसके नाम पर सरकारी भुगतान लिया गया।
नियुक्ति वेतन और मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला
ई ओ डब्ल्यू की जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन से डॉक्टरों के नियुक्ति पत्र वेतन भुगतान उपस्थिति रजिस्टर और मरीजों के इलाज से संबंधित दस्तावेज मांगे गए। जांच एजेंसी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन इनसे संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका।
जांच में वर्ष 2025 में 709 मरीजों के इलाज के नाम पर निकाली गई राशि को भी जांच के दायरे में लिया गया है। ईओडब्ल्यू ने इस रकम के भुगतान उसके इस्तेमाल और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पहले भी कार्रवाई का दावा
मामले में डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सृष्टि हॉस्पिटल के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। उनके अनुसार अस्पताल को पहले प्रतिबंधित किया गया था और जांच कमेटी द्वारा उसका पंजीयन निरस्त किया गया था। उन्होंने बताया कि अस्पताल को विभागीय पोर्टल से भी हटा दिया गया है।
ईओडब्ल्यू अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, सरकारी भुगतान और अस्पताल की ओर से प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और सरकारी राशि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।







