पीपीपी मेडिकल कॉलेज का विरोध, 5 अक्टूबर से सत्याग्रह, कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देगी कटनी एक्शन कमेटी, मेडिकल के साथ इंजीनियरिंग, माइनिंग और लॉ कॉलेज की भी मांग

कटनी, यशभारत। कटनी में पीपीपी मोड में बनने जा रहे प्राईवेट मेडिकल कॉलेज का विरोध शुरू हो गया है। कटनी एक्शन कमेटी के तत्वावधान में सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर आगामी 5 अक्टूबर से सत्याग्रह शुरू किया जा रहा है। कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना देते हुए राज्य सरकार से कटनी जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज के साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज, माइनिंग कॉलेज और लॉ कॉलेज, की मांग भी की जाएगी। विदित हो कि राज्य सरकार द्वारा कटनी जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पीपीपी मोड पर प्राईवेट मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम कछगवां के पास लगभग 25 एकड़ भूमि में निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक कटनी में मेडिकल कॉलेज के लिए मध्यप्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच समझौता हुआ है। सामाजिक संगठन अब इसका विरोध कर रहे हैं। इस अनुबंध के सामने आने के बाद से ही इसे पूरी तरह से शासकीय मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी विरोध भी हुआ था। जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना था कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा को निजी हाथों में सौंपने के बजाय सरकार को खुद जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2017 में कटनी प्रवास के दौरान कटनी में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई थी। 6 अक्टूबर 2023 में मेडिकल कॉलेज के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बाद कटनी को उन जिलों में शामिल कर दिया गया, जहां सरकारी की बजाए प्राईवेट मेडिकल कॉलेज की स्थापना होना है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दो बार कटनी दौरा भी तय हुआ लेकिन अपरिहार्य कारणों से यह टल गया। इसके बाद ग्राम कछगवां में प्रस्थावित स्थान पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। बताया जाता है कि यहां बाउण्ड्रीवॉल का निर्माण किया जा रहा है।
कटनी एक्शन कमेटी तर्क
कटनी एक्शन कमेटी का कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज बनने से स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध मिलेगी, जिससे मरीजों को जबलपुर या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। कॉलेज खुलने से मेडिकल, नर्सिंग और सपोर्ट स्टॉफ को रोजगार मिलेगा। शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। कटनी और आसपास के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कॉलेज के निर्माण और संचालन से स्थानीय व्यवसाय में तेजी आएगी। इसके अलावा छात्रों को महंगी फीस नहीं देना होगा। कमेटी का यह भी कहना है कि निजी कंपनी जनसेवा से ज्यादा लाभ कमाने पर ध्यान देगी। जिससे आम आदमी पर बोझ पड़ेगा।







