ढाई साल तक एक गलती की सजा भुगतती रही पूनम, दिल्ली तक दौड़ी, फिर भी नहीं सुलझी आधार की गुत्थी; जबलपुर में ऐसे खुला छात्रवृत्ति का रास्ता
कलेक्टर के निर्देश पर 36 मामलों का निराकरण

जबलपुर, यश भारत। एक दस्तावेज में दर्ज गलत जानकारी किसी छात्र की पढ़ाई और भविष्य के रास्ते को कितने लंबे समय तक रोक सकती है, इसकी कहानी प्रेमसागर-घमापुर निवासी बीपीटी प्रथम वर्ष की छात्रा पूनम साहू से जुड़ी है। करीब ढाई साल तक पूनम अपने आधार कार्ड में दर्ज गलत जन्मतिथि को सुधारने के लिए परेशान होती रहीं। आधार में तकनीकी अड़चन के कारण उनकी छात्रवृत्ति अटक गई और उन्हें कॉलेज की फीस भी खुद भरनी पड़ी। अब जबलपुर में आधार में सुधार होने के बाद करीब 60 हजार रुपए की रुकी छात्रवृत्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। पूनम के आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत दर्ज थी, जबकि उनके अन्य दस्तावेजों में सही जन्मतिथि दर्ज थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत सुधार की कोशिश की गई, लेकिन आधार में जन्मतिथि सुधार की निर्धारित क्रॉस-लिमिट समाप्त हो जाने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने से इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और छात्रवृत्ति पर पड़ा।
दिल्ली तक पहुंची परेशानी, जबलपुर में निकला समाधान
पूनम ने आधार में सुधार के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए। मामला तकनीकी अड़चन में फंसने के कारण सामान्य प्रक्रिया से समाधान नहीं हो पा रहा था। इसके बाद जिला प्रशासन के स्तर पर विशेष प्रयास किए गए। डीईजीएम चित्रांश त्रिपाठी के समन्वय और यूआईडीएआई के अधिकारियों की मदद से मामले को विशेष प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया। आखिरकार पूनम के आधार में आवश्यक सुधार हो गया। आधार में सुधार के बाद अब पूनम को करीब 60 हजार रुपए की रुकी छात्रवृत्ति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आगे की छात्रवृत्ति, शैक्षणिक प्रक्रियाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने से जुड़ी अड़चनें भी दूर हो गई हैं। पूनम ने समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन और डीईजीएम चित्रांश त्रिपाठी का आभार जताया है।
पूनम जैसी 36 फाइलों का हुआ निराकरण
पूनम का मामला अकेला नहीं था। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और यूआईडीएआई की टीम ने आधार से जुड़ी ऐसी 36 समस्याओं का निराकरण कराया। इनमें बालगृह गोकलपुर के 8 बालक, लाडली बसेरा की 12 बालिकाएं और राजकुमारी बाई निकेतन की 12 बालिकाएं शामिल हैं। इन मामलों में किसी के आधार में नाम या जन्मतिथि संबंधी गड़बड़ी थी, तो कहीं फिंगरप्रिंट अपडेट नहीं हो पा रहा था। कुछ मामलों में आधार रिजेक्शन और क्रॉस-लिमिट जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं। इन अड़चनों के कारण बच्चों और युवाओं की पढ़ाई, दाखिला, छात्रवृत्ति तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा था।
विशेष एसओपी से सुलझीं तकनीकी अड़चनें
डीईजीएम चित्रांश त्रिपाठी के समन्वय में यूआईडीएआई के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी टीम ने विशेष एसओपी के तहत इन मामलों का समाधान कराया। गोकलपुर में अपार और समग्र आईडी से जुड़ी समस्याएं दूर की गईं, जबकि दोनों बालिका संस्थाओं में आधार संबंधी अड़चनों का निराकरण किया गया। पूनम के लिए आधार में हुआ सुधार महज एक दस्तावेज में बदलाव नहीं है। ढाई साल से छात्रवृत्ति और पढ़ाई के बीच खड़ी तकनीकी अड़चन दूर होने के बाद अब उनके लिए आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का रास्ता भी साफ हो गया है।







