बौद्ध धर्म के नाम पर बांग्लादेशियों का फर्जीवाड़ा: भोपाल-ग्वालियर के मठों के पते पर बने 57 फर्जी पासपोर्ट, STF जांच 5 राज्यों तक पहुंची

बौद्ध धर्म के नाम पर बांग्लादेशियों का फर्जीवाड़ा: भोपाल-ग्वालियर के मठों के पते पर बने 57 फर्जी पासपोर्ट, STF जांच 5 राज्यों तक पहुंची
भोपाल, यशभारत। मध्यप्रदेश में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें घुसपैठियों ने पहचान छिपाने के लिए धार्मिक स्थलों को अपना ढाल बनाया। स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए भोपाल और ग्वालियर के बौद्ध मठों का इस्तेमाल किया और बांग्लादेशी नागरिकों को बौद्ध अनुयायी बताकर उनके भारतीय दस्तावेज तैयार कराए।
धार्मिक पहचान की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आए कुल 70 फर्जी पासपोर्ट में से 57 पासपोर्ट केवल बौद्ध मठों के पतों पर जारी हुए थे। इनमें से 40 पासपोर्ट भोपाल स्थित एक बौद्ध मठ और 17 ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर पंजीकृत मिले। गिरोह का मकसद बौद्ध अनुयायी की आड़ लेकर पुलिस और प्रशासनिक सत्यापन प्रक्रिया को चकमा देना था। मठों के अलावा बैतूल से 11, छिंदवाड़ा से 1 और पांढुर्णा से 1 फर्जी पासपोर्ट जारी होने की पुष्टि हुई है। ये सभी दस्तावेज वर्ष 2021 से 2023 के बीच बनाए गए थे।
असम से मध्य प्रदेश तक फैला बांग्लादेशी जाल
रैकेट का मुख्य सरगना रियाल चौधरी मूल रूप से बांग्लादेशी नागरिक है। उसने सबसे पहले असम के कामरूप जिले में फर्जी पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र तैयार कराए। इसके बाद वह मध्यप्रदेश के बैतूल पहुंचा और स्थानीय नेटवर्क के साथ मिलकर फर्जी पासपोर्ट का कारोबार शुरू कर दिया। एसटीएफ की एक टीम फिलहाल कामरूप में डेरा डाले हुए है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि असम में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किन-किन लोगों ने उसकी मदद की।
चार गिरफ्तार, 25-25 हजार रुपये में सौदा
एसटीएफ अब तक इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी है। सरगना रियाल चौधरी के अलावा नेटवर्क से जुड़े विप्लव अधिकारी, नागपुर से पकड़े गए जॉय चौधरी (गुजरात का पता) और त्रिपुरा से गिरफ्तार प्रियंक चौधरी (मूल निवासी कोलकाता) से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रति पासपोर्ट 20 से 25 हजार रुपये लिए जाते थे।
पुलिस वेरिफिकेशन और सरकारी तंत्र रडार पर
एसटीएफ डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा के अनुसार, इस मामले में सबसे गंभीर सवाल पुलिस वेरिफिकेशन और प्रशासनिक जांच को लेकर खड़े हो रहे हैं। एसटीएफ इस बात की जांच कर रही है कि मठों के पते पर बिना गहन सत्यापन के पासपोर्ट कैसे जारी हो गए। इस आपराधिक साजिश या लापरवाही में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही इन फर्जी पासपोर्ट पर विदेश यात्रा करने वाले संदिग्धों का रिकॉर्ड भी निकाला जा रहा है।







