10 साल में 504 प्रसूताओं, 9981 नवजातों ने तोड़ा दम, कटनी में स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटीलेटर पर, बेपरवाही से कराह रहे मरीज, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के दावों की पोल खोल रहे आंकड़े

कटनी, यशभारत। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भले ही बड़े-बड़़े दावे किए जाते हों लेकिन हकीकत यह है कि जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटीलेटर पर है और इलाज के अभाव में मरीज कराह रहा है। जिला चिकित्सालय हो या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक और उप स्वास्थ्य केन्द्र। कहीं स्टाफ की कमी है तो कहीं संसाधनों की और कहीं समय पर जननी एक्सपे्रस नहीं पहुंचने के कारण प्रसूताएं दम तोड़ रही है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 5 महीनों के भीतर एंबुलेंस नहीं मिलने और समय पर इलाज न हो पाने के कारण 8 प्रसूताओं की जान जा चुकी है। पिछले 10 सालों के आंकड़ों की बात करें तो अब तक 5 से ज्यादा महिलाओं की मौत हो चुकी है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर देखरेख के तमाम सरकारी दावों की पोल आंकड़े खुद खोल रहे हैं। एक तरफ राज्य सरकार अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ कटनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बद से बदतर हो गई है। स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर और आपात स्थिति में मरीजों को जबलपुर रिफर करना पड़ रहा है और कईयों बार जबलपुर पहुंचने के पहले ही मरीजों की जान चली जाती है।
कागजों में 17, सडक़ पर सिर्फ 7 एंबुलेंस
जिले में आपातकालीन वाहन सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। आंकड़ों के मुताबिक कटनी जिले के लिए कुल 17 जननी इमरजेंसी वाहन आवंटित हैं, लेकिन धरातल पर मात्र 7 वाहन ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष 10 वाहन कहां हैं या किस स्थिति में हैं, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। वाहनों की इस भारी कमी का खामियाजा दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
9 हजार से ज्यादा नवजातों की मौत
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कटनी जिले में पिछले 11 वर्षों में 9 हजार 981 नवजातों ने जन्म लेते ही या कुछ ही समय के भीतर दम तोड़ दिया। बर्थ एस्फिक्सिया संक्रमण (जन्म के समय सांस न ले पाना) और सही समय पर आईसीयू-आईसीएनयू सुविधाएं न मिलना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
व्यवस्था में सुधार के नहीं हो रहे प्रयास
नौ माह तक सैकड़ों कष्ट सहते हुए एक मां बच्चे को अपनी कोख में पालती है। परिवार नए मेहमान के आगमन की तैयारियों और खुशियों में जुटा होता है लेकिन स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी और घोर लापरवाही इस खुशी को मातम में बदल रही है। कटनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का आलम यह है कि पिछले 10 वर्षोँ में प्रशासनिक बेपरवाही और समय पर इलाज न मिलने के कारण 504 गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा सामान्य मौतों की दर से काफी अधिक है। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के प्रयास जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में दम तोड़ रहे हैं। निगरानी प्रणाली की अक्षमता और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा।







