सागर शराब महात्रासदी : प्यालों में जहर, फाइलों में राहत: 19 मौतों के बाद 1 दर्जन से अधिक मौतों का दावा, करीब 40 की गई जान?, मांगे हुई सूनी , अनाथ हुआ बचपन… शराब के जहर से क्षेत्र में मातम
आंकड़ों में उलझा प्रशासन, क्या मुआवजे से लौटेगा अनाथों का सहारा?

सागर, यशभारत l बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां स्थानीय ग्रामीणों और विपक्ष का दावा है कि बीते तीन दिनों में मौतों का आंकड़ा 40 के पार पहुंच चुका है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर अब तक केवल 19 मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि की गई है। आंकड़ों की इस बाजीगरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुआवजा और कागजी लीपापोती किसी अनाथ हुई बेटी या बेसहारा बुजुर्ग के दर्द को कम कर सकती है?

आंकड़ों की खींचतान, धरातल पर पसरा मातम
क्षेत्रीय दौरे पर पहुंचे विपक्षी नेताओं का दावा है कि दर्जनों गांवों में स्थिति अत्यंत दयनीय है और उन्होंने स्वयं पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर 40 से अधिक मौतों की पुष्टि की है। आसपास के अनेक गांवों में लगातार मौत हो रही हैं, वहीं, शासन और प्रशासन 19 मौतों का आंकड़ा देकर स्थिति को नियंत्रित बताने में लगा है। आंकड़े चाहे जो भी हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसी ने अपना जवान बेटा खोया है, तो किसी परिवार का एकमात्र कमाने वाला पति या पिता हमेशा के लिए चला गया। कई घर ऐसे हैं जहां बुजुर्ग मां-बाप का सहारा छिन गया है और मासूम बच्चे अनाथ हो चुके हैं।
घटना के बाद जागा आबकारी और पुलिस महकमा

त्रासदी के तुरंत बाद सागर पुलिस और आबकारी विभाग की रातों-रात बढ़ी सक्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिन जंगलों और गांवों से अब लगातार अवैध शराब के जखीरे पकड़े जा रहे हैं, वहां पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? एक ही दिन में दर्जनों मामले दर्ज होना और तस्करों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी यह दर्शाती है कि सूचनाएं पहले से मौजूद थीं, लेकिन तंत्र आंखें मूंदे बैठा था।
बलि का बकरा बना निचला अमला, शीर्ष जवाबदेही गायब

कार्रवाई के नाम पर हर बार की तरह इस बार भी स्थानीय निचले अमले को तितर-बितर या निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।कल बंडा SDM आरती यादव एवं एसडीओपी प्रदीप वामिकी को हटा दिया गया हालांकि, आबकारी विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्धारकों की जवाबदेही तय करने पर मौन साधा गया है।
जब तक केवल तात्कालिक निलंबन के बजाय अवैध शराब के पूरे सिंडिकेट और जिम्मेदार शीर्ष तंत्र पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों पर लगाम लगाना नामुमकिन है।







