मंदाकिनी थमी, अब मलबे से जिंदगी को पटरी पर लाने की चुनौती : सफाई और पुनर्वास अभियान, गलियों से घरों तक हटाया जा रहा गाद-कचरा…. देखें पूरे विडियो

सतना/चित्रकूट। मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब सामान्य हो गया है, लेकिन भीषण बाढ़ के बाद चित्रकूट के सामने जिंदगी को पूरी तरह पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर जमा गाद, मिट्टी और कचरे के ढेर को हटाने का काम लगातार जारी है। प्रशासन और स्थानीय निकायों की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचकर सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को बहाल करने में जुटी हैं।

बाढ़ के दौरान जिन सड़कों और रास्तों पर भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा जमा हो गया था, वहां सफाई के बाद आवागमन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। मुख्य मार्गों की सफाई पूरी होने के बाद अब टीमों का फोकस गलियों और बाढ़ प्रभावित घरों पर है। घरों के अंदर और आसपास जमा गाद तथा कचरे को मशीनों और ट्रैक्टरों की मदद से बाहर निकाला जा रहा है।
गलियों और घरों से हटाया जा रहा मलबा
चित्रकूट के गऊघाट मार्ग, पुराने लंका तिराहे, पुरानी तहसील क्षेत्र और अन्य प्रभावित इलाकों में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। भरत घाट के आसपास भी मशीनरी लगाकर मिट्टी और मलबा हटाया जा रहा है। नगर निगम सतना के साथ विभिन्न नगर परिषदों और जनपद पंचायतों से बुलाया गया अमला भी अभियान में लगाया गया है।

प्रशासन का जोर केवल रास्तों को साफ करने पर नहीं, बल्कि बाढ़ के बाद पैदा होने वाले संक्रमण के खतरे को कम करने पर भी है। प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। नयागांव समेत कई इलाकों में दवा का छिड़काव और सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है, ताकि गंदगी के कारण जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
पेयजल को लेकर विशेष सतर्कता
बाढ़ के बाद पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षित पानी के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी के कैंपर पहुंचाए जा रहे हैं। चित्रकूट के साथ लसूरिया और आसपास के डूब प्रभावित क्षेत्रों में भी पेयजल तथा जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
हैंडपंपों की जांच के साथ उनका क्लोरीनेशन और जर्मेक्स डालने का काम किया जा रहा है। ग्रामीणों को भी पानी को लेकर सावधानी बरतने और केवल सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की समझाइश दी जा रही है। रामपुर बघेलान जनपद की ग्राम पंचायत किचवरिया में हैंडपंपों का क्लोरीनेशन कराया गया। ग्रामीणों की मांग पर कुओं के जलस्रोतों के उपचार के लिए जर्मेक्स भी उपलब्ध कराया गया।
इसी तरह जैतवारा क्षेत्र की ग्राम पंचायत झरी में भी जल स्रोतों की स्वच्छता और क्लोरीनेशन के साथ लोगों को पेयजल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
इंटेक वेल की पाइपलाइन सुधारने में जुटी टीमें
चित्रकूट में हनुमान धारा रोड स्थित पुल के पास जल आवर्धन योजना के इंटेक वेल की पाइप में मलबा फंसने से जलापूर्ति प्रभावित हुई थी। पानी की सप्लाई दोबारा सुचारु करने के लिए पाइप को साफ करने और तकनीकी सुधार का काम कराया जा रहा है। इस कार्य में एनडीआरएफ की टीम की भी सहायता ली जा रही है।
अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में डटे
बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित परिवारों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लौटें। मंदाकिनी का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए सामान्य जिंदगी की वापसी की यह जंग अभी जारी है।






