सड़क हादसों में मौत रोकने की कवायद, नौ जिलों में लागू होगा जीरो फेटिलिटी प्लान

सड़क हादसों में मौत रोकने की कवायद, नौ जिलों में लागू होगा जीरो फेटिलिटी प्लान
भोपाल, यश भारत। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए नौ जिलों में जीरो फेटिलिटी कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इसके तहत दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां सड़क सुरक्षा के इंतजाम मजबूत किए जाएंगे। कार्यक्रम में सरकारी विभागों के साथ स्थानीय समितियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी की जाएगी। इसके लिए जल्द ही अल्पकालीन और दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार कर उसका क्रियान्वयन किया जाएगा।
मुख्य सचिव कार्यालय में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। कमेटी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित कर उनकी मदद ली जानी चाहिए। बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों से दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में कमी लाने के लिए प्रभावी उपायों पर तेजी से काम करने को कहा।
बैठक में सड़क सुरक्षा के लिए 4 ई को प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया गया। इसमें इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, इंफोर्समेंट और एजुकेशन शामिल हैं। दुर्घटना संभावित सड़कों और ब्लैक स्पॉट में आवश्यक सुधार, हादसे के बाद घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा, यातायात नियमों का प्रभावी पालन और वाहन चालकों को जागरूक करने की दिशा में एक साथ काम किया जाएगा।
चिन्हित जिलों में कार्यक्रम के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सीएसआर और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्राथमिकताएं तय कर योजनाओं को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए गए।
गैर-बीमित वाहनों पर कसेगा शिकंजा
सड़क सुरक्षा के साथ गैर-बीमित वाहनों के संचालन को रोकने के लिए भी नई व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार जिन वाहनों का बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप से ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे और उन्हें वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा। वाहन की पहचान के बाद पोर्टल पर बीमा की स्थिति जांची जाएगी।
प्रदेश में सबसे अधिक गैर-बीमित वाहनों वाले जिले का चयन कर वहां यह व्यवस्था पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी। इसके परिणामों के आधार पर इसे अन्य जिलों तक विस्तार दिया जा सकता है।
दुर्घटना के कारणों पर होगी निगरानी
बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव बर्णवाल ने सुप्रीम कोर्ट कमेटी के निर्देशों, केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा योजनाओं और प्रदेश में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य में लागू अल्पकालीन और प्रस्तावित दीर्घकालीन उपायों की स्थिति भी बताई।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण किया। इसमें दुर्घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़ों के साथ ब्लैक स्पॉट, हिट एंड रन मामलों, राहवीर योजना और पीएम राहत योजना से जुड़े उपायों की जानकारी दी गई। बैठक में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार के साथ निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
जीरो फेटिलिटी कार्यक्रम के माध्यम से सरकार का लक्ष्य दुर्घटनाओं के बाद राहत व्यवस्था तक सीमित रहने के बजाय ऐसे उपाय विकसित करना है, जिससे हादसों और उनसे होने वाली मौतों की संभावना को पहले ही कम किया जा सके।






