कटनी
बड़ा खेल : अपनी ही रिटेल आईडी पर डंप की यूरिया की बोरियां, छोटे व्यापारियों को बना रहे थे मोहरा, खाद सिंडिकेट पर बड़ा प्रशासनिक प्रहार, उप संचालक कृषि ने दिए जांच के निर्देश, जिले के सभी होलसेलरों को जारी होंगे नोटिस


टैगिंग की आड़ में आर्थिक शोषण और भाषा का छल
रिपोर्ट के मुताबिकए होलसेल व्यापारी कागज़ों पर टैगिंग यूरिया के साथ अन्य बेमतलब का सामान बेचने का शब्द इस्तेमाल करने से बचते हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से दुकानदारों पर भारी दबाव बनाते हैं। हाल ही में सामने आए उदाहरण में 70 बोरी यूरिया के साथ 10 हजार रुपये का बेंटोनाइट सल्फर जबरन लेने की शर्त रखी गई। इसके अलावा 266 की सरकारी दर पर मिलने वाली यूरिया बोरी पर भाड़ा और हमाली का खर्च मिलाकर छोटे व्यापारियों को 310 से 320 की लागत आ रही है। बताया जाता है कि शासकीय नियमों के कारण वे इसे 266 में ही बेचने को मजबूर हैंए जिससे उन्हें प्रति बोरी 30 से 40 का सीधा घाटा सहना पड़ रहा था।
प्रशासन का सख्त रुख, गोदामों में होगी अचानक छापेमारी
उप संचालक कृषि ने आश्वस्त किया है कि गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी घंटाघर दुकान व गोदाम, सनत ट्रेडर्स, श्री राम बीज भंडार सहित अन्य बड़े डीलरों के गोदामों में टीम भेजकर स्टॉक की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। कागजों में दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद माल में अंतर पाए जाने या अवैध टैगिंग का प्रमाण मिलने पर संबंधित होलसेलर्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबितध्निरस्त किए जाएँगे। छोटे रिटेल विक्रेताओं को उनकी आवश्यकतानुसार बिना किसी शर्त के पारदर्शी तरीके से यूरिया आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
व्यापारियों और किसानों में जगी उम्मीद
कृषि विभाग द्वारा दिए गए जाँच के इन कड़े निर्देशों के बाद जिले के खाद सिंडिकेट और मुनाफाखोरों में हडक़ंप मच गया है। छोटे रिटेल व्यापारियों और किसान संगठनों ने इस कड़े रुख का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही यूरिया की कालाबाजारी पर पूर्ण विराम लगेगा।









