भोपालमध्य प्रदेश

शराब टेंडरों में चुनिंदा कंपनियों के दबदबे पर उठे सवाल पटवारी ने 2012 13 से अब तक 33 जिलों के टेंडरों के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की

शराब टेंडरों में चुनिंदा कंपनियों के दबदबे पर उठे सवाल

पटवारी ने 2012 13 से अब तक 33 जिलों के टेंडरों के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की

भोपाल, यश भारत। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शराब टेंडर प्रक्रिया में वर्षों से कुछ चुनिंदा कंपनियों के कथित दबदबे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने वर्ष 2012 13 से 2026 27 तक प्रदेश के 33 जिलों में हुए प्रमुख शराब टेंडरों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ पूरी प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग की है। पटवारी ने आरोप लगाया कि शराब कारोबार में कुछ चुनिंदा कंपनियों का लंबे समय से प्रभाव बना हुआ है। उनके अनुसार सामने आए दावों में चार समूहों के पास करीब 70 प्रतिशत बाजार होने तथा कई जिलों में वर्षों से उन्हीं कंपनियों को टेंडर मिलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति सही है तो इसे महज संयोग नहीं माना जा सकता। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि परिणामों में पुराने पैटर्न की पुनरावृत्ति हो रही है तो सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पटवारी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की कार्रवाई के बाद वर्ष 2022 में कथित तौर पर बदले टेंडर पैटर्न का हवाला देते हुए कहा कि यदि इसके बाद फिर वही स्थिति दिखाई दे रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

पटवारी ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि शराब कारोबार से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के राजस्व में प्राथमिकता कारोबारियों के हित हैं या प्रदेश के राजस्व और जनता के हित। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और राजस्व की रक्षा करना है।

उन्होंने मांग की कि वर्ष 2012 13 से अब तक सभी प्रमुख शराब टेंडरों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। किन कंपनियों को किस जिले में कितने वर्षों तक टेंडर मिले बोली लगाने वाली कंपनियों की जानकारी उनकी पात्रता और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित करने मिलीभगत या कार्टेल की आशंका की जांच हो तथा वास्तविक राजस्व और संभावित प्रतिस्पर्धी बोली से मिलने वाले राजस्व के अंतर का भी परीक्षण कराया जाए।

पटवारी ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है तो सरकार को संबंधित दस्तावेज और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

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