प्रशासन की बेरुखी पर ग्रामीणों का करारा तमाचा: चंदा और श्रमदान से खुद बना रहे स्कूल भवन
एक साल तक नहीं बनी प्राथमिक शाला, हर घर से 500 रुपये जुटाकर ग्रामीणों ने शुरू किया निर्माण कार्य; 52 बच्चे एक कमरे में पढ़ने को मजबूर

यशभारत डिंडोरी । जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम भालापुरी के शिकारी टोला के ग्रामीणों ने शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए प्रशासनिक उदासीनता को आईना दिखा दिया है। एक वर्ष तक लगातार आवेदन, गुहार और इंतजार के बावजूद जब प्राथमिक शाला का नया भवन नहीं बन सका, तो ग्रामीणों ने सरकार का इंतजार छोड़ स्वयं स्कूल निर्माण का जिम्मा उठा लिया।
जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष प्राथमिक शाला का जर्जर भवन असुरक्षित होने के कारण डिस्मेंटल कर दिया गया था। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पालकों ने अपने स्तर पर झोपड़ीनुमा व्यवस्था कर स्कूल का संचालन शुरू कराया। उस समय इस गंभीर समस्या को स्थानीय मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थायी भवन निर्माण की दिशा में प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वर्तमान में विद्यालय के 52 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक मकान के एक ही कमरे में कराई जा रही है। पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाएं एक साथ संचालित होने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षिका का कहना है कि सीमित स्थान और संसाधनों के कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
प्रशासन की लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब स्वयं पहल करते हुए प्रत्येक परिवार से 500-500 रुपये का चंदा एकत्र किया है। इसके साथ ही ग्रामीण श्रमदान कर नए स्कूल भवन के निर्माण में जुट गए हैं। गांव में चल रहा यह सामूहिक प्रयास बच्चों के भविष्य को संवारने की ग्रामीणों की चिंता और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा सरकारी फाइलों और आश्वासनों की भेंट नहीं चढ़ने दी जाएगी। यही कारण है कि पूरे गांव ने एकजुट होकर स्कूल निर्माण का बीड़ा उठाया है।
हालांकि यह पहल प्रेरणादायक है, लेकिन इसके साथ ही कई सवाल भी खड़े करती है। जब ग्रामीण सीमित संसाधनों में अपने बच्चों के लिए स्कूल बनाने का संकल्प ले सकते हैं, तो करोड़ों रुपये के बजट और संसाधनों वाले जिम्मेदार विभाग एवं जिला प्रशासन अब तक इस मूलभूत आवश्यकता को पूरा करने में क्यों विफल रहे? यह सवाल आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।







