रिहायशी भवनों में चल रहे कोचिंग सेंटर, हजारों छात्रों की जान दांव पर
कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी भगवान भरोसे

रिहायशी भवनों में चल रहे कोचिंग सेंटर, हजारों छात्रों की जान दांव पर
कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी भगवान भरोसे
जबलपुर, यशभारत। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन जबलपुर में जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में हैं। शहर में बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से कोचिंग संस्थान, ट्यूटोरियल और ट्यूशन क्लासेस संचालित हो रहे हैं, जहां हजारों छात्रों की जान हर दिन जोखिम में पड़ रही है।जानकारी के मुताबिक शहर में करीब 25 बड़े कोचिंग संस्थान और 150 से अधिक छोटे ट्यूटोरियल व ट्यूशन क्लासेस संचालित हैं। इनमें से अधिकांश में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास और सुरक्षा संबंधी मूलभूत व्यवस्थाएं तक मौजूद नहीं हैं। हालात यह हैं कि कई संस्थान रिहायशी मकानों में चल रहे हैं, जहां व्यावसायिक गतिविधियां तो हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
एक ही रास्ता, हादसा हुआ तो बचना मुश्किल
शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटरों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक संकरा रास्ता है। किसी भी आपात स्थिति में सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए न तो वैकल्पिक मार्ग है और न ही कोई आपदा प्रबंधन व्यवस्था। ऐसे में यदि आग जैसी घटना होती है तो स्थिति भयावह हो सकती है।
गुजरात हादसे के बाद चली थी खानापूर्ति की जांच
गुजरात में कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जबलपुर में भी जांच अभियान शुरू किया गया था, लेकिन कुछ दिनों की औपचारिकता के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नतीजा यह है कि आज भी अधिकांश संस्थान पुराने ढर्रे पर ही संचालित हो रहे हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
यादव कॉलोनी, नेपियर टाउन, मदन महल, एमआर-4 रोड, राइट टाउन, गोरखपुर और सिविल लाइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
बड़ा सवाल : हादसे का इंतजार क्यों?
लखनऊ की त्रासदी के बाद भी यदि जिम्मेदार विभाग नहीं जागे तो शहर में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी अनहोनी के बाद ही कार्रवाई करेगा या फिर समय रहते हजारों छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?






