झपावन नदी : प्राचीन जल स्त्रोतों का हो संरक्षण, जल गंगा संवर्धन अभियान से बदल सकती है तस्वीर

विजयराघवगढ़, यशभारत। प्रशासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में प्रभावशाली जन अभियान के रूप में उभर कर आने वाले उक्त अभियान न केवल जलस्त्रोतों को संरक्षण को गति प्रदान की है, बल्कि लागू होने वाले हर नगर व शहर की जल व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। अभियान के अंतर्गत क्षेत्र में नदियों घाटों सार्वजनिक जलाशय एवं जल संरचनाओं की सफाई एवं पुनर्जीवन का कार्य लगातार किया जा रहा है। प्रशासन के सहयोग से मंगाई गई ट्रेस क्लीनर मशीन एवं पोकलेन मशीन की सहायता से नदी की सफाई अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें जलाशयों के अपशिष्टों को हटाकर जल प्रवाह को सुचारु बनाया गया है। अभियान के तहत योजना स्तर सुधार पर किए गए फोकस में विजयराघवगढ़ को भी उक्त अभियान से जोडक़र झपावन नदी के झिरियाघाट की तस्वीर बदलने आम जनों द्वारा मांग की गई है, ताकि नगर की जीवन दायिनी झपावन नदी के समीप प्राचीन झिरियों के जल स्त्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। नगर परिषद प्रशासन के जन प्रतिनिधि अधिकारियों को स्मरण दिलाते हुए नगर के लोगों द्वारा अपेक्षा की गई है कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रशासन से मांग कर नगर के झिरिया घाट के प्राचीन झिरियों में जल स्त्रोतों की खोज हेतु प्रयास किया जाय ।और झपावन नदी के झिरिया घाट को नगर का दार्शनिक स्थल बनाया जाय।
झिरिया घाट में गंदे पानी की निकासी
ऐतिहासिक नगरी में प्राचीन झरिया घाट मे उक्त चार झिरियों के जल स्रोतो से समूचे नगर में पूजन भोजन सहित अन्य उपयोगो के लिए केवल और केवल एक ही स्थान था जहां के शुद्ध पेयजल को नगर के जन जन का उपयोग हो सकता था। किंतु शासन की योजनाओं द्वारा जनहित हेतु विभिन्न जल स्त्रोतों द्वारा पेयजल व्यवस्था होने के कारण उक्त प्राचीन जल स्रोतो में आज गंदगी का आलम बना हुआ है। जिसके उत्थान साफ सफाई की मांग जन सामान्य द्वारा हमेशा की जाती रही है। किंतु कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्रशासन से जन अपेक्षा की जा रही है कि प्रदेश शासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के जन हितैषी योजना के तहत प्राचीन जल स्थल की तस्वीर बदलने का प्रयास किया जाए।







