एक साथ कई समूह के डिजिटल सिग्नेचर हुए गायब, किसानों का अटका भुगतान
कलेक्ट्रेट स्थित खाद्य विभाग में नई डीएससी अप्रूव कराने महिलाएं दे रही आवेदन

जबलपुर, यश भारत। गेहूं उपार्जन में भुगतान को लेकर कुछ किसान परेशान हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 5 से अधिक स्व-सहायता समूहों के ऐसे उपार्जन केंद्र हैं, जहां पिछले एक सप्ताह से किसानों का भुगतान अटक गया है। इसके पीछे जो जानकारी मिल रही है, वह यह है कि उक्त उपार्जन केंद्रों का संचालन करने वाले महिला स्व-सहायता समूहों के डिजिटल सिग्नेचर, जिसे डीएससी भी कहा जाता है, वह गुम गए हैं। इसके चलते भुगतान प्रक्रिया में स्व-सहायता समूह के डिजिटल सिग्नेचर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे किसानों के खातों में पैसे नहीं जा रहे हैं।
एक साथ हुए गायब
इस पूरे मामले में एक बात गौर करने वाली है कि लगभग आधा दर्जन समूहों के डिजिटल सिग्नेचर की डिवाइस एक साथ कैसे गायब हो गई और सिर्फ यह घटना समूहों के साथ ही क्यों हुई, समितियों के साथ क्यों नहीं हुई, जो अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि इसके पीछे की जो थ्योरी है, उसके बारे में प्रशासन को पूरी तरह से जानकारी है, लेकिन वे इस बारे में कुछ कह नहीं रहे। यदि इस बारे में प्रशासनिक अधिकारी कुछ कह दें तो फिर पूरी की पूरी उपार्जन प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में खड़ी हो जाएगी। ऐसे में इस मामले पर खामोशी बरती जा रही है।
यह होती है प्रक्रिया
जब किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचता है तो सबसे पहले पोर्टल पर उसकी एंट्री होती है। उसके बाद उक्त अनाज को गोदाम में जमा किया जाता है। गोदाम में जमा होने के बाद उसका वेयरहाउस डिपॉजिट तैयार होता है। इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और वेयरहाउस द्वारा कुछ किसानों की सूची बनाई जाती है, जिसका बुक में एक्सेप्टेंस तैयार होता है। फिर भुगतान के लिए समिति द्वारा उसे वेरिफाई किया जाता है, जिस पर अपने डिजिटल सिग्नेचर किए जाते हैं, जिसे डीएससी लगाना कहते हैं। इसके बाद नागरिक आपूर्ति निगम उक्त पत्रक पर अपने डिजिटल सिग्नेचर करता है, जिसके बाद भोपाल से उक्त नामों को भुगतान के लिए बैंक को प्रेषित कर दिया जाता है। लेकिन जब समूहों की डीएससी नहीं मिल रही है, ऐसे में किसानों के भुगतान अटके हुए हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि पहले दिन से ही डीएससी नहीं मिल रही है। यह डीएससी लगभग एक सप्ताह पहले से गायब हुई है और इसके पहले के भुगतान इन्हीं डीएससी के माध्यम से हो गए हैं।
डीएससी क्या है और कैसे बनती है
डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) एक पेन ड्राइवनुमा डिवाइस होती है, जो एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र है। इसका उपयोग ऑनलाइन दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए किया जाता है। यह हस्ताक्षरकर्ता की पहचान को प्रमाणित करता है और दस्तावेज में किसी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में मदद करता है। भारत में डीएससी को कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथॉरिटीज (सीसीए) से मान्यता प्राप्त सर्टिफाइंग अथॉरिटीज, जैसे ई-मुद्रा, कैप्रिकॉर्न, पैंटासाइन और वेरासिस जारी करती हैं। डीएससी बनवाने के लिए आवेदक को पहचान एवं पते के दस्तावेज, फोटो तथा वीडियो या बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सत्यापन के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।








