कैसी कही – फितरती – प्रमोशन की राह में जांच एक्सप्रेस का रेड सिग्नल

कैसी कही – फितरती – प्रमोशन की राह में जांच एक्सप्रेस का रेड सिग्नल
सरकारी महकमों में फाइलों की चाल को लेकर अक्सर किस्से सुनने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही दिलचस्प हो गया। मंत्रालय में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायत की है कि उनकी पदोन्नति की गाड़ी वर्षों से प्लेटफॉर्म पर खड़ी है, जबकि जांच एक्सप्रेस आगे बढऩे का नाम नहीं ले रही। विभागीय जांच लंबित होने के कारण प्रमोशन का टिकट अब तक कन्फर्म नहीं हो पाया। अधिकारी का आरोप है कि जांच फाइल को इतनी सावधानी से संभाला गया कि वह आगे बढऩे के बजाय अलमारी और टेबलों के बीच ही घूम रही है। मामला अब न्यायिक मंच तक पहुंच गया है, जहां कई जिम्मेदार कुर्सियों से जवाब मांगा गया है। नोटिस जारी होने के बाद विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोग कह रहे हैं कि फाइलें अब दौड़ेंगी, जबकि कुछ का मानना है कि वे पहले की तरह आराम से टहलती रहेंगी।
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ब्रिज की दीवार पर जिम्मेदारों की चुप्पी
राजधानी का चर्चित ब्रिज एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले इसकी डिजाइन चर्चा में थी, अब इसके बीचों-बीच खड़ी दीवार लोगों का ध्यान खींच रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस ढांचे ने निर्माण के समय जितने सवाल खड़े किए थे, उससे कहीं ज्यादा सवाल अब उसके सुधार को लेकर उठ रहे हैं। निर्माण में गड़बडिय़ों की चर्चा के बाद जांच बैठी, फाइलें चलीं, बैठकें हुईं और आखिरकार जिम्मेदारियों का ऐसा गणित निकला कि कई सवाल तो रह गए, लेकिन जवाब गायब हो गए। कुछ अधिकारियों को राहत मिली और मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते की ओर बढ़ गया। अब हालात यह हैं कि ब्रिज के बीच दीवार खड़ी है, लेकिन उसे हटाने या सुधारने की दिशा में कोई स्पष्ट रास्ता दिखाई नहीं देता। मंत्रालय में लंबी बैठक हुई इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई, मगर जब समाधान पूछा गया तो कमरे में मौजूद लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। जवाब शायद किसी दूसरी फाइल में बंद था।
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खजाने का पैसा लौटाओ, वरना बजट की नलकी बंद
मंत्रालय के सरकारी गलियारों में इन दिनों एक दिलचस्प संदेश तेजी से घूम रहा है जो पैसा जहां का है, उसे वहीं पहुंचाओ। दरअसल, कई विभागों ने सरकारी खजाने से निकली रकम को बैंक खातों में ऐसे संभालकर रखा हुआ है। अब वित्तीय पहरेदारों ने सख्त अंदाज में फरमान जारी किया है कि बैंक खातों में आराम फरमा रही अतिरिक्त राशि जल्द से जल्द खजाने में वापस जमा कराई जाए। चेतावनी भी साथ में है कि यदि रकम समय पर नहीं लौटी तो अगले वित्तीय वर्ष के बजट की तिमाही खुराक रोक दी जाएगी। सरकारी दफ्तरों में इस आदेश के बाद हलचल बढ़ गई है। जिन खातों में करोड़ों रुपये लंबे समय से विश्राम कर रहे थे, अब उन्हें वापस बुलाने की कवायद शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि कुल राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
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बयान का बवाल और फूलों की फुलवारी
राजधानी से लेकर जिलों तक इन दिनों एक बयान ने ऐसा गुल खिलाया कि राजनीतिक मौसम अचानक गरमा गया। मंच से निकले कुछ शब्द हवा में तैरते-तैरते सीधे विरोधियों के आंगन में जा गिरे। फिर क्या था, नाराजगी की फसल लहलहाने लगी और जवाबी कार्यक्रमों का दौर शुरू हो गया। दिलचस्प बात यह रही कि इस बार विरोध का अंदाज भी निराला था। कहीं फूल भेंट कर संदेश दिया गया तो कहीं सोशल मीडिया पर शब्दों के गुलदस्ते सजाए गए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी कि अब तीर-कमान का जमाना गया, फूल और पोस्ट ही सबसे असरदार हथियार हैं। उधर बयान के अर्थ निकालने वालों की भी कमी नहीं रही। किसी ने उसमें व्यंग्य खोजा, किसी ने संदेश और किसी ने भविष्य की रणनीति। जवाबी बयान भी आए और फिर बयानों की पिंग पोंग शुरू हो गई। इसी बीच पुराने वीडियो भी धूल झाडक़र मैदान में उतार दिए गए। सोशल मीडिया पर उनकी परेड शुरू हो गई।







