टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई
ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में प्रमुख चेहरा बनाए जाने की चर्चाएं

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और संभावित गुटबाजी की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के हालिया रुख ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें पार्टी के बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, उनके इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही समर्थक विधायकों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं। इसके बावजूद विधानसभा परिसर में हुई गतिविधियों ने टीएमसी के अंदरूनी हालात को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
गौरतलब है कि 1 जून को टीएमसी नेतृत्व ने उलुबेरिया ईस्ट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। पार्टी का कहना था कि दोनों नेता संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं कर रहे थे और उनकी गतिविधियां पार्टी हितों के विपरीत थीं। निष्कासन के साथ ही उनसे सभी संगठनात्मक पद और जिम्मेदारियां भी वापस ले ली गईं।
बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा पहुंचने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट विधायकों की संख्या वास्तव में बड़ी है, तो इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। वहीं, विपक्ष भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
इस बीच, बागी खेमे की ओर से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में प्रमुख चेहरा बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि टीएमसी नेतृत्व ने इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में विधायकों की वास्तविक स्थिति और उनके रुख के स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह केवल असंतोष की अभिव्यक्ति है या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत। फिलहाल, टीएमसी के भीतर उठी इस हलचल ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गतिविधियों को नया मोड़ दे दिया है।







