ऊपर बन गया सेटअप तो नीचे के घोटाला कर्मचारियों पर हो गई कार्यवाही
जिले में उपार्जन का इकलौता मामला जहां प्रबंधक को छोड़कर सिर्फ प्रभारी और ऑपरेटर पर हुई एफआईआर

जबलपुर, यश भारत। मझौली धान घोटाले में नए-नए मामले उजागर हो रहे हैं। इसमें एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वह यह है कि मझौली समिति के प्रबंधक अखिलेश भट्ट का ऊपर के अधिकारियों से मजबूत सेटअप बन गया था, जिसके चलते सिर्फनीचे के कर्मचारियों पर मामला दर्ज किया गया। यश भारत को मिली जानकारी के अनुसार, सहकारिता के कुछ अधिकारियों के माध्यम से खाद्य और उपार्जन से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का सेटअप तैयार हुआ था। इसके बाद सिर्फ दो लोगों पर मामला दर्ज किया गया, नहीं तो इसके पहले पिछले दो सालों में उपार्जन को लेकर जितने भी मामले दर्ज किए गए हैं, उनमें प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज की गई है, क्योंकि प्रबंधक के बायोमेट्रिक या ओटीपी के बिना कोई भी एंट्री संभव नहीं है।
दोहरे चरित्र पर दे रहे तर्क
प्रबंधन पर मामला दर्ज न करने को लेकर कुछ अधिकारियों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि प्रबंधन के पास तीन केंद्रों की जिम्मेदारी थी, ऐसे में वह एक केंद्र पर कैसे ध्यान दे सकता है। लेकिन इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके पहले लगभग 15 से ज्यादा मामलों में जिला प्रशासन द्वारा एफआईआर की गई है, जो उपार्जन और परिवहन से संबंधित थे। उन सभी मामलों में जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा प्रबंधकों पर भी कार्रवाई की गई, जबकि उन प्रबंधकों के पास भी दो से लेकर चार केंद्रों की जिम्मेदारी थी। ऐसे में प्रशासन की कार्यवाही ही उनके दोहरे चरित्र को दर्शाती है। या तो प्रशासन द्वारा पूर्व में दर्ज किए गए मामले गलत थे, या फिर इस बार की गई कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। खास बात यह भी है कि इस जांच में वही अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने पूर्व में प्रबंधकों पर मामले दर्ज कराए हैं। लेकिन इस मामले में उन्होंने दोहरा चरित्र दिखाया। ऐसे में कलेक्ट्रेट के गलियारों में चल रही सेटअप की चर्चाएं कहीं सही तो नहीं हैं।







