
अजीत पवार के बाद शरद पवार फिर बन सकते हैं संबल
मुंबई, यश भारत महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग का अंत होने के साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) आज सबसे बड़े नेतृत्व संकट का सामना कर रही है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के अचानक निधन के बाद पार्टी के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि अब संगठन की कमान किसके हाथों में सौंपी जाए। एनसीपी की राजनीति वर्षों तक अजीत पवार की मजबूत पकड़, विधायकों पर उनके नियंत्रण और निर्णय क्षमता के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उनके जाने से पार्टी में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
यह संकट ऐसे समय उभरा है जब अजीत पवार गुट और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के बीच फिर से एकजुट होने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही थी। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इसी दिशा में एक संकेत माना गया था। हालांकि चुनावी परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे, लेकिन भविष्य में मिलकर काम करने की संभावना बनी हुई थी। अब अजीत पवार के निधन ने उत्तराधिकार और संभावित विलय दोनों मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।
एनसीपी में नेतृत्व की दौड़ मुख्य रूप से तीन धड़ों के बीच मानी जा रही है, पवार परिवार के सदस्य, अजीत पवार के साथ आए उनके भरोसेमंद सहयोगी और ऐसे क्षेत्रीय नेता जिनका अपना जनाधार है। परिवार से सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, जिन्होंने 2024 में बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और बाद में राज्यसभा सदस्य बनीं। बेटे पार्थ पवार को कभी उत्तराधिकारी के रूप में देखा गया था, लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता फिलहाल सीमित है।
वफादार नेताओं में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे अनुभवी चेहरे शामिल हैं, जिनके पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव है। वहीं धनंजय मुंडे और छगन भुजबल जैसे नेता लोकप्रियता रखते हैं






