
यश भारत की पड़ताल लगातार जारी (पार्ट-3)
नाले के भीतर से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन, वहीं से भरा जा रहा पानी
गंदगी और नाले के पानी के बीच से निकल रही लाइन, लोगों की सेहत पर खतरा
जबलपुर, यस भारत। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद पेवजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। इसी कड़ी में वस भारत की पड़ताल में जबलपुर के एक क्षेत्र में सामने आया है कि नाले के भीतर से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन से लोग सीधे पानी भर रहे हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति पैदा कर रहा है।
मौके पर देखा गया कि खुले नाले के अंदर से पेयजल पाइपलाइन गुजर रही है। नाले में गंदा पानी, कचरा और बदबू साफदिखाई दे रही है। इसी पाइपलाइन में अस्थायी तौर पर पाइप और डिब्बे लगाकर पानी निकाला जा

अधारताल में नाले के नीचे लगे जइप लाइन से पानी भरते रहवासी।
रहा है। ऐसे वातावरण में गुजर रही पाइपलाइन से पानी भरना स्वच्छता मानकों पर सीधा सवाल साड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित जलापूर्ति बाधित रहने के कारण मजबूरी में इसी पाइपलाइन से पानी भरना पड़ता है।
पानी घरों में रोजमर्रा के उपयोग के लिए लिया जा रहा है। आसपास की दुकानों में भी इसी पानी का इस्तेमाल हो रहा है। दुकानों में इसी पानी से बर्तन धोने और खाद्य सामग्री तैयार करने जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार यदि नाले के भीतर से गुजर रही पाइपलाइन में कहीं भी लीकेज होता है, तो नाले का दूषित पानी सीधे पेयजल में मिल सकता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। पहले भी शहर के कई इलाकों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद नालों के भीतर से गुजर रही पुरानी पाइपलाइनों को हटाने या सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। यही कारण है कि लोगों की सेहत लगातार जोखिम में बनी हुई है।
शहर में दूषित पानी या नाले से गुजर रही पाइपलाइन देखें? मोबाइल नंबर 9580635995
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इंदौर में दूषित पानी से बीमार पड़ा जबलपुर का छात्र, हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि
मेट्रो हॉस्पिटल जबलपुर में उपचार जारी
। जबलपुर निवासी आदित्य मिश्रा, जो इंदौर के भवरकुआं क्षेत्र में रतकर चीबीए की पढ़ाई कर रहा था, दुषित पेयजल के सेवन से गंभीर रूप से बीमार हो गया। प्रारंभिक जांच में आदित्य के रक्त में हेपेटाइटिस-ए संक्रमण की पुष्टि हुई है। वर्तमान में जबलपुर स्थित मेट्रो हॉस्पिटल में उसका उपचार चल रहा है और चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर है। जानकारी के अनुसार आदित्य इंदौर में सार्वजनिक नल से पानी लेकर दैनिक उपयोग करता था। इसी दौरान वह तथा उसके दो-तीन दोस्त एक साथ बीमार पड़ गए। तबीयत बिगड़ने पर आदित्य आगे की ट्रैकिंग के लिए देहरादून गया, जहां उसकी हालत और गंभीर हो गई। वहां चिकित्सकों ने उसे दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में भर्ती कराने की सलाह दी, लेकिन आर्थिक स्थिति अनुकूल न होने के कारण वह इलाज नाहीं करा सका और वापस जबलपुर लौट आया। जबलपुर पहुंचने पर हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे तत्काल मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां की गई जांच में डॉक्टरों ने दूषित पानी से बीमारी होने की आशंका जताई, जो बाद में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि से सही साबित हुई। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर उपचार मिलने से मरीज की स्थिति अब नियंत्रण में है।
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पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद आदित्य के परिजनों ने प्रदेश सरकार एवं इंदौर नगर प्रशासन से भवरकुआं क्षेत्र सहित छात्र बहुल इलाकों में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाता, तो एक होनहार छात्र को इस तरह जानलेवा बीमारी से नहीं जूझना पड़ता।







