हमीदिया अस्पताल के सामने बीच सड़क पर सजी दुकानों से ट्रैफिक व्यवस्था वेंटिलेटर पर

हमीदिया अस्पताल के सामने बीच सड़क पर सजी दुकानों से ट्रैफिक व्यवस्था वेंटिलेटर पर
मेट्रो काम और इस्तमा बाजार के बीच फंसी एंबुलेंस, दर्जनों अस्पतालों का रास्ता हुआ ब्लॉक
भोपाल,यशभारत। राजधानी के सबसे बड़े और पुराने हमीदिया अस्पताल के सामने की ट्रैफिक व्यवस्था इस समय पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। पुराने शहर में एक तरफ मेट्रो निर्माण के चलते रास्ते बंद हैं, तो दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड द्वारा आवंटित इस्तमा की दुकानों ने बची-खुची सड़क पर भी कब्जा जमा लिया है। नतीजा यह है कि जिस सड़क से मरीजों को ‘जीवनदान’ मिलना चाहिए, वह सड़क खुद जाम में दम तोड़ रही है।

बीच सड़क पर बाजार, कहाँ जाए मरीज?
अस्पताल के ठीक सामने बीच सड़क पर अस्थाई दुकानें सजा दी गई हैं। यह अतिक्रमण इतना जबरदस्त है कि चौड़ी सड़क अब एक संकरी गली में तब्दील हो गई है। हमीदिया के आसपास एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक ‘मेडिकल हब’ है। सड़क पर दुकानों के कारण एंबुलेंस और मरीजों के वाहनों को निकलने की जगह नहीं मिल रही। इस वजह से गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचने वाले मरीज और उनके परिजन घंटों जाम में फंसकर बेबस नजर आ रहे हैं।
मेट्रो और मार्केट की दोहरी मार
पुराने शहर में मेट्रो का काम चलने के कारण कई प्रमुख मार्ग पहले से ही डाइवर्ट या बंद हैं। ऐसे में सारा ट्रैफिक हमीदिया रोड पर आ गया है। प्रशासन ने यातायात का दबाव देखे बिना ही सड़क पर दुकानें लगाने की अनुमति दे दी, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई है।

पार्किंग खत्म, सड़क पर ही वाहन
बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों के लिए पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। दुकानें सड़क पर हैं, तो ग्राहकों के वाहन भी सड़क पर ही पार्क हो रहे हैं। इससे पैदल चलने वालों तक के लिए जगह नहीं बची है।
जिम्मेदार बेखबर
बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में बीच सड़क पर दुकानें लगाने की इजाजत कैसे मिली? जिम्मेदार अधिकारी इस अतिक्रमण को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। प्रशासन की यह लापरवाही किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।
इनका कहना है…
ट्रैफिक व्यवस्था देखने के लिये पुलिस बल लगा हुआ है। लोग आसपास वाहन खड़े कर के चले जाते है जिनपर कार्रवाई की जाती है। ट्रैफिक को लेकर और शख्ति की जाएगी ता की हमीदिया रोड जाम की स्थिति ना बने
डीसीपी ट्रैफिक- जितेन्द्र सिंह पवार








