वायु प्रदूषण के कारण बढ़ रहे सांस के मरीज, स्वास्थ्य संस्थाओं में चेस्ट क्लीनिक स्थापित करने के निर्देश

कटनी, यशभारत। जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण आम जनमानस एवं मरीजों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खराब होती हवा की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य विभाग सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की सलाह भी दे रहा है। जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के साइड इफेक्ट्स भी दिखने लगे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बीते 10 दिनों में प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण अस्पतालों में श्नसन संबंधित समस्या वाले मरीजों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिल रहा है। इसके अलावा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत पर इसका असर दिख रहा है। जिन लोगों को पहले से ही श्वसन समस्याएं जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस की समस्या रही हैं, उनके लिए इन दिनों में दिक्कतें और भी बढऩे का खतरा है।
अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश
जिले में बढ़ते सांस के मरीजों को देखते हुए कलेक्टर आशीष तिवारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की है। कलेक्टर के निर्देश के बाद सीएमएचओ डॉ राज सिंह ठाकुर ने सभी स्वास्थ्य संस्था प्रमुखों को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश भी जारी किये हैं। सीएमएचओ ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जनए सिविल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं सभी खण्ड चिकित्सा अधिकारी को स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का कैपसिटी बिल्डिंग कराने के निर्देश . जारी किये हैं। इसके साथ ही सभी स्वास्थ्य संस्थाओ में इमरजेन्सी सेवाएं, रेफरल सेवाएं, एम्बूलेंस सेवाएं, आउटरीच सेवाएं, प्रयोगशाला सेवाएं इत्यादि को सुनिश्चित करने के आदेश जारी किये हैं। सीएमएचओ ने बताया कि वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। वायु प्रदूषण के कारण पुरानी बीमारियों में अक्सर वृद्धि, समय पूर्व मृत्यु, स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्गं में, यातायात पुलिस कर्मी और नगर निगम, नगर पालिका के कर्मी को उच्च जोखिम का भी सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रमुख को अलर्ट मोड़ के साथ उचित इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश जारी किये गए हैं।
चेस्ट विशेषज्ञ की कराई जाए उपलब्धता
प्रसिद्ध ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ एच एस नेमा ने बताया गया कि वायु प्रदूषण के कारण हृदय और फेफड़े से संबधित मरीजों की संख्या में बृद्धि देखने को मिल रही है। इन मरीजों की जांच कराकर इलाज किया जाए इसके अलावा सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में चेस्ट क्लीनिक की स्थापना की जाए। शहरी क्षेत्रों में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रए सिविल अस्पताल में चेस्ट विशेषज्ञ की उपलब्धता कराई जाए। अगर विशेषज्ञ की उपलब्धता न हो तो जिला अस्पताल एवं मेडिकल कालेज से सहयोग लिया जाए। बताया गया कि वायु प्रदूषण के चरम महीनों आमतौर पर सितम्बर से मार्च तक के दौरान क्लीनिकों को निश्चित अवधि के लिये संचालित किया जाए। इसके अलावा समस्त स्वास्थ्य संस्था प्रमुख को संस्था में आने वाले रोगियों को वायु प्रदूषण से बचाव एवं नियंत्रण हेतु जागरूक करने के भी निर्देश जारी किये गए हैं।







