मध्य प्रदेशराज्य

2026 के 5वें महीने में नौवीं घटना : किसली रेंज में फिर मिला मादा बाघिन का शव….संरक्षण का हाइटेक सिस्टम फेल

मंडला यशभारत |बेहतर वन्यजीव व प्राणी के प्रबंधन और हाइटेक सुरक्षा के लिए पहचाने जाने वाले कान्हा टाइगर रिर्जब में बाघो की लगातार मौत हो रही है। गर्मी का यह सीजन केटीआर प्रबंधन के बदइंतजामी को उजागर कर रहा है। केटीआर के कोर क्षेत्र किसली जोन क मगर नाला में मादा बाघिन का शव मिला है। पिछले 5 माह में बाघो की मौत की यह नौवीं घटना है। इन घटनाओ को लेकर केटीआर प्रबंधन के खिलाफ वनक्षेत्र के लोगो और पर्यटको में नाराजगी है। लगातार हो रही घटनाओ से केटीआर में पर्यटक व पयर्टन दोनो ही प्रभावित हो रहे है। जानकारी के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली वन परिक्षेत्र में 4 वर्षीय बाघिन का शव मिला है। जिसकी मौत की वजह कान्हा प्रबंधन के द्वारा आपसी संघर्ष बताया गया है सहायक क्षेत्र निदेशक पीके वर्मा ने इस घटना की पुष्टि की है। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों और वन्य जीव चिकित्सकों की एक टीम पहुंची है। पीएम के बाद नियमानुसार दाह संस्कार किया गया है। लगातार बाघो की मौत होने पर कान्हा टाइगर रिजर्व में हड़कंप मचा हुआ है। यहां के गाइड, जिप्सी चालक से लेकर बफर जोन के ग्रामीणो में बाघो के संरक्षण में की जा रही लापरवाही को लेकर चिंताएं देखी जा रही है। अमाही बाघिन और उसके चार शावको की क्रमश: मौत हो गई। बाघिन का पूरा कुनबा ही खत्म हो गया है और केटीआर प्रबंधन की पुख्ता सुरक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्थाएं धरी रह गई। शावको की मौत के कारणों की जांच जारी है अभी तक उनकी फारेंसिक रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया है। प्रारंभिक पीएम रिपोर्ट में शावकों की मौत की वजह भी अलग.अलग सामने आई थी दो शावकों के पेट खाली मिले यानी भूख से मौत की आशंका, जबकि तीसरे व चौथे शावक व बाघिन के फेफ ड़ों में संक्रमण की पुष्टि की गई।

सन टाइगर प्रोजेक्ट में हर वर्ष करोड़ो रूपए का बजट प्रावधान करती है जिससे बाघो व अन्य वन्यप्राणी के संरक्षण में कोई कसर ना रह जाए। इस वर्ष कान्हा टाइगर रिजर्व के सारे इंतजाम को फेल कर दिया है। केटीआर के चारो गेट में बड़ी संख्या में तैनात वन अमला की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे है। जो बाघो की लोकेशन और उनकी चाल ढाल नोटिस नहीं कर रहे है। यही वजह है कि गर्मी के सीजन में कमजोर बाघ समय पर देखभाल नहीं मिल जाने के कारण मर रहे है।

गाइड से लेकर पर्यटको में मायूसी देखी जा सकती है

कान्हा टाइगर रिजर्व घोषित करीब 51 साल बीत गए है लेकिन कम समय में लगातार बाघो की बड़ी संख्या में मरने घटना पहले कभी नहीं हुई। रिटायर्ड हो चुके गाइड व जिप्सी चालक भी लगातार मौतो को लेकर हैरत में है। उन्हे भी आजीविका को लेकर चिंता सताने लगी है। बाघो की मौतो की वजह उजागर और उन्हे बचाने के ठोस सार्थक प्रयास करने की जरूरत है। इसमें कोताही बरती गई तो बाघो को भी अन्य वन्य प्राणियों की तरह रिजर्व से शिफ्टिंग करने की योजना बनाना ना पड़ जाए।

सफल हुए कई प्रोजेक्ट

कान्हा टाइगर रिजर्व में विलुप्त हो चुके वन्यजीवो व प्राणी को दोबारा स्थापित करने के लिए सफल प्रोजेक्ट पूरे किए गए है। जो अपने आप में एक कीर्तिमान है। यहां एक दशक पहले काले हिरणो को पुर्नस्थापन किया गया है अब ये बहुतायात संख्या में केटीआर के खुले मैदान है। इसके साथ अनाथ और कमजोर बाघ शावको को जीवन देने का काम भी हुआ। गोरिल्ला बाड़े में शावको को रखकर उन्हे जंगल के लिए टे्ंड किया गया है। इतना ही नहीं इसी वर्ष 50 वर्ष पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसे को फिर से बसाने के लिए असम से चार जंगली भैंसे लाई गई है। जो जंगल के वाइल्डलाइफ सर्कल को पूरा करेगें।

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