सवाल : व्यवस्थाएं सुधारने क्या छात्राओं के अस्वस्थ होने का इंतजार करता रहा प्रशासन, सरसवाही छात्रावास में घटना के बाद एक ही दिन में कैसे सुधर गईं व्यवस्थाएं, पेयजल और बिजली व्यवस्था को किया दुरूस्त

कटनी, यशभारत। माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर सरसवाही में छात्राओं की तबियत बिगडऩे की घटना को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए छात्रावास में कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त कर दिया है। छात्राओं द्वारा सुविधाओं की मांग काफी समय से की जा रही थी लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। अब जब उनकी तबियत बिगड़ी, तब प्रशासन हरकत में आया। यदि पहले ही यह व्यवस्थाएं कर दी जातीं तो छात्राओं की तबियत नहीं बिगड़ती।
बताया जाता है कि दोनों छात्रावासों के बीच नया हैंडपंप स्थापित किया जा रहा है। पीएचई ने नलकूप की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी है। इसके अलावा विद्युत व्यवस्था को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। गौरतलब है कि ग्राम सरसवाही स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर छात्राओं द्वारा छात्रावास परिसर में ही विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, इसी दौरान कुछ छात्राओं की तबियत खराब हो गई थी। कहा जा रहा था दूषित खाद्य सामग्री के सेवन उपरांत छात्राओं की तबियत बिगड़ी, जिसके बाद छात्राओं को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। अब छात्राओं के स्वास्थ्य में सुधार है।
कलेक्टर ने कहा : बेटियों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं
कलेक्टर आशीष तिवारी ने छात्राओं के अस्वस्थ होने की घटना को लेकर कहा कि बेटियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर एवं एसडीएम प्रमोद कुमार चतुर्वेदी ने छात्रावास पहुंचकर छात्राओं के स्वास्थ्य का हाल जाना। भोजन एवं पेयजल की गुणवत्ता का निरीक्षण किया तथा सुरक्षा एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया।
स्टाफ नर्सों की तैनाती, छात्रावास तक सीसी रोड का निर्माण
छात्रावास में हुई घटना के बाद एक ही दिन में कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई हैं। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए दो स्टाफ नर्सों की तैनाती, एम्बुलेंस तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। छात्रावास परिसर में स्वच्छता अभियान चलाते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने भोजन सामग्री की जांच की। छात्रावास पहुंच मार्ग पर सीसी रोड निर्माण का कार्य भी कराया जा रहा है। विद्यालय एवं छात्रावास के बेहतर संचालन के लिए निगरानी एवं प्रबंधन समितियों का गठन भी किया गया है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सीईओ ने छात्रावास कक्षों, रसोईघर, भोजनालय, बिस्तरों, स्नानगृहों, प्रसाधन गृहों और पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राचार्य एवं छात्रावास अधीक्षक को निर्देश दिए कि प्रत्येक छात्रा को समय पर ताजा, गर्म, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए भोजन की गुणवत्ता, जल की शुद्धता और स्वच्छता की निगरानी की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य और विश्वास दोनों को मिली प्राथमिकता
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी हर सुविधा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छात्राओं को स्वच्छता, संतुलित आहार और शुद्ध पेयजल के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।
परिजनों की मांग : दोषियों के खिलाफ की जाए कार्रवाई
दूषित भोजन और पानी के सेवन से छात्राओं की तबीयत बिगडऩे की घटना के बाद छात्राओं के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में स्कूल परिसर के बाहर एकत्र हो गए। युवा समाजसेवी अरविंद सिंह टेकाम और जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए अभिभावकों ने छात्रावास प्रबंधन और शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि भोजन की गुणवत्ता और साफ सफाई को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने छात्रावास परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि छात्राओं का बेहतर उपचार प्राथमिकता है तथा जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित प्रबंधन या जिम्मेदार वेंडर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






