वाह रे कोरा विकास! : प्यासे रहवासियों का सब्र टूटा, 100 परिवार दूषित जल पीने मजबूर

सतना, यश भारत। मझगवां जनपद पंचायत के जिम्मेदारों की संवेदनहीनता और विकास के खोखले दावों की पोल उस समय खुल गई, जब ब्लॉक मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर स्थित गोडान टोला और लोटनी कोलान टोला के आदिवासी परिवारों ने अपनी पीड़ा बयां की। यहां करीब 100 परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं और दूषित पानी के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दिनों पूर्व जब मीडिया ने गांव की बदहाली को प्रमुखता से उठाया था, तब प्रशासन और पंचायत के जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया था। आनन-फानन में गांव के चौपड़े और तलैया में मशीनें लगाकर गहरीकरण का दिखावा किया गया तथा पानी के टैंकर भी भेजे गए। लेकिन यह व्यवस्था केवल कैमरों और अधिकारियों की मौजूदगी तक ही सीमित रही।
ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही मीडिया की नजरें हटीं और अधिकारियों का दौरा बंद हुआ, वैसे ही पानी के टैंकरों की आवाजाही भी रोक दी गई। नतीजा यह है कि आज भी गांव के लोग उसी गंदे और मटमैले पानी का उपयोग नहाने, कपड़े धोने और मवेशियों को नहलाने के लिए कर रहे हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल की है। ग्रामीणों को पहाड़ियों से रिसकर आने वाले पानी को बूंद-बूंद एकत्रित करना पड़ रहा है। कई परिवार प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी के इस भीषण दौर में हालात और अधिक गंभीर हो चुके हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों टोलों में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
यह मामला केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि उन सरकारी दावों पर बड़ा सवाल है जिनमें गांव-गांव विकास पहुंचाने की बात कही जाती है। जब ब्लॉक मुख्यालय से सटे गांवों की यह स्थिति है, तो दूरस्थ अंचलों के हालात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।







