राहुल के बालाघाट दौरे के अगले ही दिन 400 करोड़ का प्लान, क्या इसे दौरे का असर माना जाए

बालाघाट, यशभारत। आदिवासी बहुल बालाघाट में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत का मुद्दा अब सियासी बहस के साथ विकास और सरकारी तंत्र की सक्रियता का भी केंद्र बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के अगले ही दिन राज्य सरकार की ओर से प्रभावित पांच विकासखंडों में करीब 400 करोड़ रुपये के 1,500 विकास कार्यों की योजना सामने आई है। इसे राजनीतिक हलकों में राहुल गांधी के दौरे के बाद सरकार की सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि सरकार की ओर से यह नहीं कहा गया है कि यह योजना राहुल के दौरे के कारण शुरू की गई।
राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के जगला गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने बीमारी और कुपोषण से बच्चों को खो चुके बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने जमीन पर बैठकर पीड़ित परिवारों की बातें सुनीं और क्षेत्र की स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल तथा वन अधिकार से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। उनके दौरे को कांग्रेस ने आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने की पहल के रूप में पेश किया। सरकार की प्रस्तावित योजना के मुताबिक किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा विकासखंडों में लगभग 1,500 कार्यों पर एक साल में करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिया, स्टॉप डैम, सामुदायिक भवन और राशन दुकानों सहित कई बुनियादी सुविधाओं के काम शामिल हैं। सबसे बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च होगा। करीब 151 सड़क एवं सीसी रोड के कार्यों पर 268.94 करोड़ रुपये, 69 पुलिया एवं कल्वर्ट पर 34.02 करोड़ तथा 60 स्टॉप डैम पर 35.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा प्रभावित पांचों ब्लॉकों में 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर और अन्य स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने की योजना है।
राहुल के दौरे के बाद राजनीतिक चर्चा तेज
राहुल गांधी लंबे समय से बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे को उठा रहे हैं। सितंबर में भी उन्होंने इन मौतों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उनके बालाघाट दौरे के ठीक अगले दिन 400 करोड़ रुपये के विकास पैकेज और 1,500 कार्यों की खबर सामने आने से राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है। कांग्रेस इसे राहुल गांधी के दबाव और जमीनी मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाने का असर बता सकती है, जबकि सरकार का पक्ष यह है कि प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर योजना तैयार की गई है।
राहुल ने बनाया सरकारी जवाबदेही का मुद्दा
यानी बालाघाट में बच्चों की मौत का मुद्दा अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव, आदिवासी विकास और सरकारी जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। यह भी महत्वपूर्ण है कि केंद्र की जांच में बच्चों की मौत के पीछे किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन और अन्य चिकित्सकीय कारणों का उल्लेख हुआ। अब राजनीतिक सवाल अब यह है, क्या 400 करोड़ का यह प्लान पहले से प्रशासनिक प्रक्रिया में था, या राहुल गांधी के दौरे ने सरकार को इसकी घोषणा और क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए मजबूर किया? उपलब्ध रिपोर्टों में सरकार ने इसे राहुल गांधी के दौरे का परिणाम नहीं बताया है, इसलिए इसे फिलहाल दौरे के बाद सामने आई सरकारी सक्रियता कहना अधिक तथ्यात्मक होगा।








