मन के भावों के बीच लोगों ने सुनील रांधेलिया को अर्पित किए श्रद्धासुमन, व्यक्तित्व और कृतित्व की चर्चा, श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज पैलेस पहुंचे सभी वर्गों के गणमान्य लोग

कटनी, यशभारत। प्रतिष्ठित समाजसेवी और राजनेता सुनील रांधेलिया को श्रद्धा सुमन अर्पित करने बड़ी संख्या में शहर के लोग कल राज पैलेस पहुंचे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहर के सभी दलों के नेताओं से लेकर हर वर्ग के लोग मौजूद थे। वक्ताओं ने सुनील रांधेलिया के समाजसेवी कार्यों और संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने अपने प्रिय साथी को संगीतमयी श्रद्धांजलि अर्पित की। नम आंखों के साथ अपने दिल के भाव व्यक्त करते हुए हर वक्ता ने कहा कि सुनील रांधेलिया ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। वे हमेशा याद आएंगे। श्रद्धांजलि देने विधायक संदीप जायसवाल, महापौर प्रीति सूरी, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन, कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला सहित अन्य प्रमुख नेता पहुंचे।
श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत में रांधेलिया परिवार के सदस्यों धर्मपत्नी श्रीमती सुधा रांधेलिया, बहन अर्चना मलैया और बहनोई प्रकाश मलैया, बेटी स्वर्णिमा और दामाद अनंत जैन, पुत्र संभव और पुत्रवधु श्वेता तथा बेटी सौम्या, भांजे संकेत व अस्मिता मलैया सहित पटोरिया परिवार, पांडे परिवार, शर्मा परिवार, शुक्ला परिवार, पाठक परिवार और रांधेलिया परिवार के अन्य सदस्यों की मंच पर मौजूदगी के बीच आर्केस्ट्रा स्वीट सॉन्ग मेकर्स के कलाकारों ने सुनील रांधेलिया द्वारा कंपोज की हुई धुन के साथ मंगलभावना की प्रस्तुति दी गई। गौरतलब है कि मंगलभावना की शाब्दिक रचना तो मुनि प्रमाण सागर जी ने की है, लेकिन इसे खूबसूरती के साथ संगीतबद्ध किया है सुनील रांधेलिया ने। दिल को छू लेने वाली इस प्रस्तुति के बाद परिजनों और शहर के गणमान्य लोगों ने अपने मनोभाव व्यक्त किए।
बड़े दिलवाले थे सुनील…
श्रीमती सीमा जैन सकूरा के हृदयस्पर्शी संचालन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अपने मनोभाव व्यक्त करने की शुरुआत श्रीमती अर्चना मलैया ने की। उन्होंने कहा कि अपने सेवाभावी कार्यों से सुनील रांधेलिया ने सभी के दिलों में जगह बनाई। वे परोपकार की भावना के साथ जिंदगी जीने वाले इंसान थे। बड़ा हृदय रखते हुए उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के कार्यों में अपना योगदान दिया। बेटी स्वर्णिमा और बेटी सौम्या ने अत्यंत भावुक होकर कहा कि पापा पूरे परिवार के केंद्रबिंदु थे। अस्वस्थता के बावजूद उनके दिमाग में हमेशा चैतन्यता बनी रही। वे हर समय कुछ नया करने की सोच रखते थे। व्यवसाय को उन्होंने बुलंदी पर पहुंचाया। बड़ी रुचि से उन्होंने राज पैलेस की स्थापना की। संगीत तो उनकी आत्मा में बसता था। भगवान ने उनके जैसी महान शख्सियत को बहुत जल्दी हम सबसे छीनकर अपने पास बुला लिया। डॉ ब्रह्मा जसूजा ने सुनील रांधेलिया द्वारा स्वास्थ शिविरों के आयोजन में दिए गए योगदान को याद किया तो डॉ एसके खंपरिया ने उनके बचपन और युवा दिनों के जुड़ाव की याद ताजा की। यशभारत के समूह संपादक आशीष सोनी ने कहा कि सुनील रांधेलिया ने शहर में आर्केस्ट्रा के नए युग का सूत्रपात किया। उन्होंने कलाकारों को मंच देकर प्रतिभाओं को निखरने का मौका दिया। सिटी टेलीविजन नेटवर्क के रूप में कटनी को बड़ी सौगात दी। उन्होंने कहा कि सियासत से संगीत और व्यवसाय से समाजसेवा तक उनके कार्यों को भुलाया नहीं जा सकेगा। सौम्या रांधेलिया ने यह भी बताया कि कोरोना काल में उन्होंने लंबे समय तक लोगों के भोजन का इंतजाम राज पैलेस के माध्यम से कराया, पर कभी इसका प्रचार नहीं किया। युवक कांग्रेस के अध्यक्ष अंशु मिश्रा ने शायरी के जरिए अपनी बात कही कि एक शख्स ने सारे शहर को वीरान कर दिया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौजूदगी रही। आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने भी तुम मुझे यूं भुला न पाओगे, जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां जैसे नगमों की प्रस्तुति के जरिए अपनी श्रद्धांजलि दी। आभार प्रदर्शन पुत्र संभव रांधेलिया ने किया।








