मंडलाl कहते हैं कि यदि प्रशासन और तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाएं जुड़ जाएं, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मंडला के लोक सेवा केंद्र, बाल गृह और जिला ई-गवर्नेंस की टीम ने। बोल और सुन पाने में असमर्थ एक दिव्यांग बालक ’साहिल’, जो अपनों से बिछड़ गया था, आज सुरक्षित अपने परिवार के पास पहुँच गया है।
साहिल न तो बोल सकता था और न ही ठीक से सुन पाता था। उसे हिंदी का भी ज्ञान नहीं था, जिस कारण वह अपनी पहचान बताने में पूरी तरह असमर्थ था। उसे सुरक्षा की दृष्टि से मंडला बाल गृह में रखा गया था। पहचान का एकमात्र सिरा बालक द्वारा गुजराती भाषा में लिखे गए कुछ धुंधले संकेत थे।
इन संकेतों के आधार पर लोक सेवा केंद्र और जिला ई-गवर्नेंस टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। आधार डेटाबेस की मदद से बालक की पहचान गुजरात के वलसाड क्षेत्र के रूप में स्थापित हुई। परिजनों से संपर्क होने पर बालक की माँ और बहन मंडला पहुँचीं। बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण कर साहिल को उसके परिवार को सौंप दिया गया।
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