जबलपुरदेशभोपालमध्य प्रदेशराज्य

अतिक्रमण हटते ही फिर जम जाते हैं कब्जे 

अतिक्रमणकारी ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की उदासीनता भी जिम्मेदार

अतिक्रमण हटते ही फिर जम जाते हैं कब्जे 

अतिक्रमणकारी ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की उदासीनता भी जिम्मेदार

जबलपुर। यश भारत। शहर में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम चल रही है, लेकिन परिणाम अब तक निराशाजनक रहे हैं। शहर की सड़कों, चौराहों और बाजारों में कब्जाधारी दोबारा ठेला-टपरा और अन्य अतिक्रमण वहीं जमा देते हैं, जिससे आम नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी झेलनी पड़ रही है। अव्यवस्था का असर आम आदमी पर सड़कों और फुटपाथों पर कब्जा होने से आम आदमी को रोजमर्रा की गतिविधियां दुकानें जाना, बच्चों को स्कूल भेजना, बाजार और मेडिकल सुविधाओं तक पहुंचना सब प्रभावित हो रहा है। वहीं स्थानीय दुकानदार और छोटे व्यापारी भी अतिक्रमण के कारण ग्राहक पहुंचाने में परेशान हैं। नागरिकों का कहना है कि जब तक सख्त कार्रवाई और निरंतर निगरानी नहीं होगी, अतिक्रमण हटाने की मुहिम केवल दिखावा बनकर रह जाएगी और आम आदमी की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि जैसे ही अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम की टीम किसी इलाके में आती है, कब्जाधारी अपना सामान हटा लेते हैं। लेकिन जैसे ही टीम चली जाती है, वही अतिक्रमण पुराने स्थान पर दोबारा फैल जाता है। इससे न केवल पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को दिक्कत होती है, बल्कि सड़क पर थमते-बढ़ते जाम और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। नागरिकों का मानना है कि शहर की इस स्थिति के लिए सिर्फ अतिक्रमणकारी ही नहीं, बल्कि कभी-कभार अधिकारियों की उदासीनता भी जिम्मेदार है। लगातार कार्रवाई न होने और निगरानी के अभाव में अतिक्रमण हर बार पुराने स्थान पर जम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button