कटनी

बांधवगढ़ बफर जोन से सटे बरही के ग्राम हरवाह में हाथियों ने मचाया तांडव, फसलों को नुकसान, ग्रामीणों में आक्रोश

कटनी, यशभारत। बांधवगढ़ नेशनल पार्क के बफर जोन की सीमाओं से लगे बरही तहसील क्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों और किसानों में दहशत व्याप्त हो गई है। हाल ही में ग्राम हरवाह में हाथियों के दल ने धावा बोलकर कई किसानों की खड़ी धान की फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग क्षेत्र में सक्रिय नजर नहीं आ रहा है, जिससे इलाके में फसल की बर्बादी के साथ.साथ जनहानि का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय कृषक संजय सिंह, संतोष सिंह और गरुण यादव ने बताया कि हाथियों का झुंड निरंतर उनके खेतों में घुसकर फसलों को रौंद रहा है। इसकी जानकारी तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को दी जा चुकी है लेकिन मौके पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कर्मचारी न तो रात में गश्त कर रहे हैं और न ही वन्यप्राणियों की निगरानी को लेकर गंभीर हैं। किसानों की धान की फसलें पूरी तरह चौपट हो चुकी हैं लेकिन अभी तक न तो कटनी वन विभाग और न ही बांधवगढ़ वन मंडल द्वारा क्षतिपूर्ति या मुआवजे की कोई प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे आक्रोशित किसानों के सामने जीवनयापन और सुरक्षा दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
10 हाथियों और 2 ग्रामीणों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले से ही हाथी मानव द्वंद्व के मामले में बेहद संवेदनशील रहा है। ठीक 2 वर्ष पूर्व इसी सीमावर्ती इलाके में एक बड़ी घटना घट चुकी है। 29 अक्टूबर 2024 को बांधवगढ़ कटनी सीमा स्थित खितौली और पतौर कोर रेंज के सलखनिया बीट में गश्त के दौरान 4 जंगली हाथी मृत पाए गए थे। 30-31 अक्टूबर 2024 को जांच और इलाज के दौरान 6 अन्य हाथियों की मौत हुई। कुल 10 हाथियों की जान चली गई थी, जिसकी मुख्य वजह कोदो की फसल में बना फंगल टॉक्सिन पाया गया था। 2 नवंबर 2024 को हाथियों की मौत के बाद आक्रामक हुए झुंड ने उमरिया.कटनी सीमा पर स्थित ग्राम देवरा के निवासी रामरतन यादव को शौच के दौरान कुचलकर मार डाला था। 2-3 नवंबर 2024 को झुंड ने कटनी के बरही व खितौली क्षेत्र की ओर रुख किया, जहां ग्राम बराहे निवासी भैरव कोल पर खेत में काम करते समय हमला कर दियाए जिससे उनकी भी मौत हो गई थी।
ठोस कदम उठाने की मांग
दो साल पहले हुई इस भयानक त्रासदी के बावजूद वन विभाग की वर्तमान सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हाथियों को खदेडऩेए रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने और प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इनका कहना है
डीएफओ गर्वित गंगवार का कहना है कि हाथियों की मूवमेंट आवाजाही फिलहाल हमारी सीमा से काफी दूर है। फिर भी किसी भी अनहोनी से बचने के लिए ऐप के माध्यम से उनकी लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है। किसानों की फसलों को हुए नुकसान का पंचनामा राजस्व विभाग द्वारा तैयार कर मुआवजा दिया जाएगा।

 

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