मध्य प्रदेशराज्य

नर्मदा तट पर शराबबंदी फेल! : छोटे गुर्गों पर कार्रवाई, बड़े सरगना अब भी बेखौफ

यशभारत,  डिंडोरी।डिंडौरी। मां नर्मदा की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मां नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर दायरे में शराब विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध की ऐतिहासिक घोषणा की थी। डिंडौरी की धरती से हुई इस घोषणा को प्रदेशभर में सराहा गया था और इसके बाद नर्मदा तट क्षेत्र की शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। लेकिन वर्षों बाद अब स्थिति ऐसी बनती दिखाई दे रही है कि शराबबंदी का उद्देश्य धरातल पर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

जिला मुख्यालय डिंडौरी से लेकर समनापुर, गाडासरई, बजाग, करंजिया, शहपुरा, मेहंदवानी, विक्रमपुर और कई ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी अवैध शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है और इसके लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।

लाखों रुपये के कारोबार की चर्चा

सूत्रों के अनुसार जिले में प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध शराब खपाई जा रही है। डिंडौरी नगर के कई मोहल्लों, पान गुमटियों, किराना दुकानों, बस स्टैंड क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब बिकने की चर्चाएं आम हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन गंभीरता से जांच करे तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात अलग नहीं बताए जा रहे हैं। आरोप हैं कि वैध दुकानों से शराब निकालकर अवैध रूप से गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है, जहां एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री की जाती है। इससे एक ओर शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर अवैध कारोबारियों की चांदी हो रही है।

यह बने सप्लाई के केंद्र?

क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि गाडासरई, बजाग और कुछ अन्य क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में शराब की सप्लाई आसपास के गांवों तक पहुंचाई जा रही है। आरोप हैं कि कई स्थानों पर शराब की होम डिलीवरी तक की व्यवस्था संचालित की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं।

सफेदपोश संरक्षण की चर्चा

अवैध शराब कारोबार को लेकर सबसे गंभीर आरोप राजनीतिक और प्रभावशाली संरक्षण को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर कारोबार संभव नहीं है। आरोप हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों की शह पर यह नेटवर्क संचालित हो रहा है और कार्रवाई की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच जाती है।

यही कारण है कि जब भी कार्रवाई होती है तो छोटे विक्रेता या कथित एजेंट पकड़े जाते हैं, जबकि पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले प्रमुख चेहरे कानून की पकड़ से बाहर बने रहते हैं।

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में खुलेआम शराब बिक्री की जानकारी आम नागरिकों को है, वहां जिम्मेदार विभागों को जानकारी न होना समझ से परे है।

ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर कार्रवाई जरूर दिखाई जाती है, लेकिन उसका प्रभाव स्थायी नहीं होता। कुछ दिनों बाद फिर वही हालात बन जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कार्रवाई केवल आंकड़ों तक सीमित है या वास्तव में अवैध नेटवर्क को खत्म करने की कोई ठोस रणनीति भी है।

युवाओं और समाज पर पड़ रहा दुष्प्रभाव

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गांवों और कस्बों में आसानी से शराब उपलब्ध होने के कारण युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। कई परिवार आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं ने भी कई बार गांवों में शराब बिक्री बंद कराने की मांग उठाई है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा।

शराबबंदी के बावजूद खुलेआम बिक रही शराब को लेकर भाजपा के कुछ कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी अंदरखाने नाराज बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की मंशा और मुख्यमंत्री की योजनाओं को अवैध कारोबारियों द्वारा कमजोर किया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।

नर्मदा तट पर शराबबंदी लागू होने के बावजूद आखिर अवैध शराब कहां से आ रही है? इसके पीछे कौन लोग हैं? कौन संरक्षण दे रहा है? कार्रवाई केवल छोटे लोगों तक ही क्यों सीमित रहती है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक सरगनाओं तक पहुंच पाएगा?

इन सवालों के जवाब अब जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग को देने होंगे। जिले की जनता को उम्मीद है कि नर्मदा तट की गरिमा और शासन की मंशा के अनुरूप अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

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