दबी फाइलों पर ‘लाशों’ का पहरा: डिप्टी सीएम के गृह जिले में फजीहत के बाद कार्यवाही, दो सीनियर डॉक्टरों पर एक्शन

रीवा । 26 अगस्त को कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत हो गई। जिस दिन कल्पना की मौत हुई। उस दिन ऑन काल पर डॉ सोनल थीं। वह बुलाने के बाद भी नहीं पहुंची थी। इस एक छोटी सी लापरवाही ने उनकी नौकरी छीन ली। तीन साल पहले दबी हुई फाइल इस मौत ने फिर वापस खुलवा दी। बध्ुावार को अचानक मेडिकल कॉलेज में ईसी यानि कार्यपरिषद की बैठक आयोजित की गई और बैठक में दबे एजेंडे को वापस रखा गया। इस एजेंडे पर पहले ही निर्णय लेकर डॉ सोनल अग्रवाल को बाहर का रास्ता दिखाया जाना था। कमिश्नर चिकित्सा शिक्षा ने तीन साल पहले ही डॉ सोनल को बर्खास्त करने और डॉ बीनू ङ्क्षसह की तीन इंक्रीमेंट रोकने का आदेश जारी किया था। हालंाकि मेडिकल कॉलेज के जो भी डीन आए उन्होंने इस एजेंडे पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसका खामियाजा कई प्रसूताओं को जान देकर चुकाना पड़ा। हर बार बड़ा हंगामा गायनी में हुआ, उसमें डॉ सोनल का नाम आया है।
डॉ सोनल अग्रवाल की बर्खास्तगी की फाइल पर फैसला नहीं लेने से सभी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। इस बार तो पूरा रीवा ही स्वास्थ्य के मामले में बदनाम हो गया। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला की फजीहत हुई वह अलग थी। स्वास्थ्य विभाग और रीवा के संजय गांधी अस्पताल का दम निकालने के बाद अंतिम में डॉ सोनल अग्रवाल को नौकरी से बाहर करने का निर्णय ले ही लिया गया। इस पूरे मामले में डॉ बीनू सिंह को भी बचाने की कोशिश की गई थी। पुराने मामले में गायनी विभाग की एचओडी डॉ बीनू सिंह भी दोषी पाई गईं थी। उनके खिलाफ तीन इंक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया था।
हाल ही में जब दोबारा बीनू सिंह एचओडी बनी तो विभाग में बवाल मच गया था। उनके कार्यप्रणाली को लेकर डॉक्टरों में गुस्सा था। कई चिकित्सकों ने नौकरी तक छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें हटाया नहीं गया। उन्हें नर्सिंग का डायरेक्टर बना कर भोपाल प्रतिनियुक्ति में भेज दिया गया। अब जाकर उनकी तीन इंक्रीमेंट रोकने का निर्णय लिया गया है। डॉ सोनल अग्रवाल और डॉ बीनू सिंह के खिलाफ कार्रवाई के दौरान डीन डॉ मनोज इंदूलकर थे। जब तक वह रहे कार्यपरिषद में निर्णय नहीं हो पाया। इसके बाद पिछले तीन सालों से डॉ सुनील अग्रवाल डीन रहे। डॉ सुनील अग्रवाल ने इस प्रकरण को ही एजेंडे से पूरी कार्रवाई किए बिना ही गायब कर दिया था। अब फिर से वही एजेंडा श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया और बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया। इस बैठक में डीन के अलावा डीएमई भी शामिल थी। इसके अलावा ईसी के अन्य सदस्य मौजूद रहे।







