आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण पर ब्रेक, 7 सालों में कम्पलीट नहीं हो पाए आधा सैकड़ा, 30 का निर्माण अब तक शुरू नहीं, शासन से मिली 142 की स्वीकृति

कटनी, यशभारत। सरकारी भवनों के निर्माण में लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 7 सालों में स्वीकृत किए गए भवनों में से आधे का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पया। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता, प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और संबंधित विभाग के अधिकारियों की बेपरवाही का नतीजा है कि जिले में आज भी 343 आंगनबाड़ी केन्द्र किराए के भवनों पर संचालित हो रहे है, जहां न तो बिजली की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही पानी के उचित इंजताम। महिला एवं बाल विकास विभाग को इसके लिए प्रतिमाह 5 से 6 लाख रूपए किराया देना पड़ रहा है। शहर की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा केन्द्र किराए के भवनों पर चल रहे हैं। शहरी इलाके में सरकारी जमीनों की अनुपलब्धता की वजह से सरकारी इमारत बनाने में परेशानी आ रही है लेकिन जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र भवन स्वीकृत हो गए हैं, वहां भी समयावधि पूर्ण होने के बाद भी भवनों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
142 में से 59 ही बनकर तैयार
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021-21 से लेकर 2025-26 तक कुल 142 भवनों को शासन स्तर से स्वीकृति मिली। इसके लिए फंड भी महिला एवं बाल विकास विभाग को जारी किया गया। विभाग ने ग्रामीण यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर इसका प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायत को भेज दिया। जिला पंचायत ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण की स्वीकृति देते हुए निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत को प्रस्ताव भेज दिया लेकिन विडम्बना यह है कि पिछले 7 सालों में केवल 59 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया है। अभी भी आधा सैकड़ा भवनों का निर्माण अधर में लटका हुआ है और करीब ढाई दर्जन के आसपास भवनों का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। यह भी पता चला है कि 7 भवनों का निर्माण कई कारणों के चलते अब तक शुरू नहीं हो पाया। राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए राज्य आयोजना, 15 वित्त, पीएम जनमन मद से 11 लाख 22 हजार रूपए का बजट जारी किया जाता है।
जिले में 1713 आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन
विभाग से मिली जानकारी में बताया गया है कि जिले में कुल 1713 आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। जिसमे 1533 आंगनबाड़ी केन्द्र और 180 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र शामिल है। 1713 आंगनबाड़ी केन्द्रों को 63 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।
विभाग का तर्क
इस संबंध में जब विभागीय अधिकरियों से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद विभाग के पास केवल फंड आता है, चंूकि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत है, इसलिए प्रस्ताव बनाकर जिला पंचायत के पास भेज दिया जाता है और आंगनबाड़ी केन्द्र भवन के जल्द से जल्द निर्माण के लिए कहा जाता है।





