तीनों आरोपियों की आ रही अलग लोकेशन, गिरफ्तारी के लिए पुलिस को करना पड़ रही मशक्कत, निलंबित सीएसपी के घर पर भी पुलिस ने की पड़ताल, अब तक गिरफ्तारी नहीं

कटनी, यशभारत। जमीन सौदेबाजी मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक तीनों आरोपियों की अलग-अलग लोकेशन मिल रही है, जिससे उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस को तीन अलग-अलग टीमें बनाना पड़ी है, हालांकि अभी तक पुलिस किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की तलाश के लिए कटनी पुलिस की टीम ने मंगलवार की सुबह उनके राजगढ़ जिले के पिछोर स्थित गृहग्राम पहुंचकर परिजनों से पूछताछ की और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई लेकिन नेहा पच्चीसिया का कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस को यह खबर मिली थी कि निलंबित सीएसपी यहां हो सकती हैं या उनके संबंध में कोई महत्वपूर्ण जानकारी परिजनों से मिल सकती है। इसी आधार पर टीम पिछोर पहुंची। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की और संभावित ठिकानों की जानकारी ली लेकिन नेहा पच्चीसिया वहां नहीं मिलीं। टीम को बिना गिरफ्तारी के वापस लौटना पड़ा। पुलिस का कहना है कि संभावित शरणस्थलों और करीबियों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर रखकर तकनीकी लोकेशन ट्रैकिंग तेज कर दी गई है। आरोपियों के विदेश भागने की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रूपए का इनाम घोषित करने के साथ ही लुकआउट नोटिस भी जारी किया है।
न्यायालय में दर्ज हुए बयान
उधर दूसरी तरफ मंगलवार को एसआईटी की टीम झिंझरी जेल में बंद रमेश लोधी को लेकर जिला न्यायालय पहुंची। जहां उसके न्यायालयीन कथन दर्ज किए गए। सूत्रों ने बताया कि शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष अपने पूर्व बयानों को दोहराते हुए सीएसपी द्वारा दबाव बनाकर बंधक जैसी स्थिति में रखकर बेहद कम कीमत पर जमीन की रजिस्ट्री अपने करीबियों के नाम कराने के पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है। कोर्ट में दर्ज हुए ये बयान मुकदमे की विवेचना और आने वाले समय में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन का पक्ष बेहद मजबूत करेंगे।
हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की तैयारी
यह भी पता चला है कि जिला अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब फरार सीएसपी और सह आरोपियों की कानूनी टीम मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकती है हालांकि जब तक उच्च न्यायालय से कोई अंतरिम राहत या स्थगनादेश जारी नहीं होता, तब तक पुलिस और एसआईटी के पास फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार करने का पूरा कानूनी अधिकार है, जिसके लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें अन्य जिलों और राज्यों में भी दबिश दे रही हैं।
यह लगे हैं आरोप
पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ जमीन सौदे और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि हत्या के मामले में कार्रवाई झेल रहे परिवार पर जमीन के सौदे को लेकर दबाव बनाया गया और कम कीमत में रजिस्ट्री कराई गई। जांच के जमीन सौदे से जुड़े मामले में उनके न्यायालयीन कथन दर्ज किए गए। एसआईटी पूर्व में सामने आए आरोपों, गवाहों के बयानों, दस्तावेजों और दौरान जमीन की कीमत और भुगतान को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आने की बात कही गई है। अब पुलिस की दबिश राजगढ़ जिले के पिछोर तक पहुंच चुकी है। गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज हो रहे हैं और दस्तावेजों की पड़ताल भी जारी है लेकिन मामले के तीनों नामजद आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।







