मध्य प्रदेशराज्य

अब पन्ना से बांधवगढ़ तक बेखौफ चलेगा बाघ, MP में 4 टाइगर कॉरिडोर को NTCA की मंजूरी

सतना यश भारत। विंध्य के जंगलों और वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने पन्ना टाइगर रिजर्व के इंडिकेटिव टाइगर कॉरिडोर सब-प्लान को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व को बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना को औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। योजना के तहत विकसित होने वाले चार टाइगर कॉरिडोर में से दो का बड़ा हिस्सा सतना और मैहर के वन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

इस योजना का उद्देश्य वर्षों से कमजोर पड़ चुके प्राकृतिक वन संपर्क को फिर से मजबूत करना है, ताकि बाघ सुरक्षित रूप से एक टाइगर रिजर्व से दूसरे तक पहुंच सकें और उनकी आनुवंशिक विविधता (जीन फ्लो) बनी रहे।

 

ये होंगे चार टाइगर कॉरिडोर

स्वीकृत योजना के अनुसार चार प्रमुख कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे—

पन्ना – शाहगढ़ – नौरादेही

पन्ना – मझगवां – चित्रकूट

पन्ना – रानी दुर्गावती अभयारण्य – नौरादेही

पन्ना – पवई – उचेहरा – बांधवगढ़ – संजय टाइगर रिजर्व

इनमें मझगवां-चित्रकूट और पन्ना-पवई-उचेहरा-बांधवगढ़ कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा सतना और मैहर जिले से होकर गुजरता है।

 

योजना में मझगवां, बृजपुरा, पहाड़ीखेड़ा और उचेहरा को ‘स्टेपिंग स्टोन हैबिटेट’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी पन्ना से निकलकर बांधवगढ़ या संजय की ओर जाने वाले बाघ इन क्षेत्रों में सुरक्षित ठहर सकेंगे। इसके लिए जंगलों का पुनर्स्थापन, जल स्रोतों का विकास, घासभूमि सुधार और शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने जैसे कार्य किए जाएंगे।

 

पहले भी इन रास्तों से गुजर चुके हैं बाघ:

योजना में शामिल वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार पन्ना टाइगर रिजर्व के रेडियो कॉलर लगे कई बाघ पहले ही मझगवां और चित्रकूट की दिशा में इन प्राकृतिक मार्गों का उपयोग कर चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रस्तावित कॉरिडोर केवल कागजों की योजना नहीं, बल्कि पहले से इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक वन्यजीव मार्ग हैं।

 

योजना के तहत कमजोर वन क्षेत्रों का पुनर्विकास, अवैध शिकार पर नियंत्रण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वैज्ञानिक निगरानी और विभिन्न विभागों के समन्वय पर भी विशेष जोर रहेगा। इसके लागू होने के बाद सतना और मैहर मध्य भारत के उस महत्वपूर्ण टाइगर लैंडस्केप का हिस्सा बन जाएंगे, जो पन्ना, बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व के बीच बाघों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

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