डिण्डौरी/शहपुराl जैविक खेती देखने का मन करे तो चले जिला डिण्डोरी और मिले जिला डिण्डोरी के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू से जिन्होंने विगत 9 वर्षो से जैविक खेती स्वंय करते हुए ग्रामीण किसान बंधुओ को जैविक खेती करने के लिए लगातार प्रशिक्षित कर रहे है बात यही नहीं रुकती किसान बंधुओ के साथ महाविद्यालय, विद्यालय, सरकारी संस्थान, एनजीओ ऐसे अनेको मंच के माध्यम से जिला डिण्डोरी सहित विभिन्न जिला में जैविक खेती का प्रशिक्षण देने का अमूल्य कार्य कर रहे है। इसके साथ- साथ अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का नि:शुल्क लाइव डेमो भी दिखाते है।
बिहारी लाल जिला डिण्डोरी के लिए सान व गौरव है उनके इस पूनीत कार्य के कारण राज्य स्तरीय जैविक, राष्ट्रीय स्तर में जैविक खेती में पुरस्कार मिल चुका है यही नही जवाहर लाल कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर सहित अनेक संस्थानों ने बिहारीलाल को पुरस्कार दे चुकी है ।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोहानी देवरी के छात्र-छात्राओं ने औद्योगिक भ्रमण व्यावसायिक शिक्षा (ट्रेड – कृषि) के अंतर्गत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गौवंश आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण व प्रायोगिक जानकारी दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक कृषि के साथ-साथ आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-सम्मत खेती के तरीकों से अवगत कराना रहा।
जंगल के पेड़ को यूरिया कौन देता है कीटनाशक का छिड़काव कौन करता है उन्हें पानी कौन देता है लेकिन जब समय आता है तब पेड़ फल से लद जाते है जंगल के पेड़ के किसी भी पत्ते को तोड़ लीजिए और लैव में टेस्ट करा लीजिए एक भी तत्व की कमी नहीं मिलती जंगल में जो नियम काम करता है, वही हमारे खेत में करना चाहिए और यही है प्राकृतिक कृषि और प्राकृतिक कृषि का सिध्दांत।
कार्यक्रम में नर्मदांचल गौ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जैविक कृषि विशेषज्ञ व भारतीय किसान संघ डिण्डौरी के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू द्वारा विद्यार्थियों को जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। उन्होंने केंचुआ खाद, बीजोपचार में बीज की शोध प्रक्रिया उक्ठा जैसे रोग से बचाने के लिए बताया। जीवामृत, अग्नि अस्त्र पर विभिन्न प्रकार के कीटों को नियंत्रण करना जैसे जैविक संसाधनों के उपयोग और निर्माण की विधि समझाया।साथ ही मृदा परीक्षण पर भी विस्तृत जानकारी दिया।
बिहारी लाल साहू ने कहा कि “गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती न केवल मृदा की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। आदिवासी बहुल डिण्डौरी जैसे क्षेत्रों में यह खेती स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सकती है।”
विद्यालय के प्राचार्य महेश वरकड़े व्यावसायिक प्रशिक्षक कृषि शिक्षिक प्रदीप नागपुरे, विपुल सोनी और समस्त स्टाफ की उपस्थिति में यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ तहसील शहपुरा के अध्यक्ष प्रमोद कुमार मौर्या एवं कृषि ट्रेड के 50 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशिक्षण में रुचि लेकर भविष्य में जैविक खेती को अपनाने की इच्छा व्यक्त की।यह पहल विद्यार्थियों को न केवल कृषि कार्यों में दक्ष बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी भी बनाएगी।